कॉकरोच जनता पार्टी में फूट: छात्रों और समर्थकों को दरकिनार कर हुई राजनीतिक सेटिंग? मनीष ब्रह्मभट्ट के दावों से मचा सियासी घमासान
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और इसके प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में असंतुष्ट धड़े ने ‘सीजेपी डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) के गठन का विधिवत ऐलान कर दिया। संगठन की शुरुआत करते हुए सीजेपी-डी के संस्थापक मनीष ब्रह्मभट्ट ने सीधे तौर पर अभिजीत दीपके और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच कथित मिलीभगत और बैकडोर ‘डील’ का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
‘सत्ता के लिए लोगों का इस्तेमाल करते हैं केजरीवाल’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मनीष ब्रह्मभट्ट ने अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल का राजनीतिक इतिहास लोगों और सामाजिक आंदोलनों को अपनी सत्ता की महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए इस्तेमाल करने का रहा है। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण और मुफ्त योजनाओं के वादों के जरिए विभिन्न वर्गों का उपयोग किया गया और अब उसी रणनीति के तहत जंतर-मंतर पर खड़े हुए जनआंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश की जा रही है। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस गुप्त समझौते के चलते ही सीजेपी की संगठनात्मक टीम में केवल आम आदमी पार्टी से जुड़े नेताओं को ही प्राथमिकता दी गई है।
कोर टीम में छात्रों और महिलाओं की उपेक्षा का आरोप
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी की राष्ट्रीय कोर टीम की संरचना पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन की रीढ़ छात्र और युवा थे, उनकी राष्ट्रीय कोर टीम में एक भी छात्र प्रतिनिधि को जगह नहीं दी गई। इसके अलावा पुरानी महिला प्रवक्ता के अतिरिक्त किसी नई महिला चेहरे को स्थान नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के समय लंगर और सेवा भाव से मदद करने वाले सिख समाज, मुस्लिम समुदाय या अन्य सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को किनारे करने का दावा
सीजेपी-डी के संस्थापक ने आगे कहा कि आंदोलन के समर्थन में अपनी मूल पार्टियां छोड़कर आए राष्ट्रीय जनता दल (RJD), समाजवादी पार्टी (SP), शिवसेना और एनसीपी (NCP) के समर्पित कार्यकर्ताओं को भी संगठन में कोई स्थान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के असली संघर्षशील साथियों को दरकिनार कर सीजेपी को केवल एक खास राजनीतिक दल की बी-टीम और विशुद्ध डील करने वाला मंच बना दिया गया है, जिसके खिलाफ अब ‘सीजेपी डेमोक्रेटिक’ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएगी।
