पाटन चुनाव केस में नया मोड़, भूपेश बघेल को नहीं मिली राहत; 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई
पाटन: छत्तीसगढ़ की पाटन विधानसभा सीट से जुड़े 2023 के चुनाव विवाद में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज कराने की मांग की गई थी, लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका से जुड़े कुछ अहम सवालों का फैसला रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल के दौरान किया जाना है।
विजय बघेल ने भूपेश बघेल के निर्वाचन को दी चुनौती
भाजपा सांसद विजय बघेल ने 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव के नतीजे को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। इस याचिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन सहित कई आरोप लगाए गए हैं।
याचिका में भूपेश बघेल के निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अभी अदालत में साबित होना बाकी है और अंतिम निर्णय साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही होगा।
45 दिन की समय-सीमा पर उठाया गया था सवाल
भूपेश बघेल की ओर से याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति जताई गई थी। उनका पक्ष था कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद चुनाव याचिका दाखिल करने के लिए निर्धारित 45 दिन की अवधि का पालन नहीं हुआ।
हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज विवरण के मुताबिक पाटन चुनाव का परिणाम 3 दिसंबर 2023 को घोषित हुआ था और 45 दिन की अवधि 17 जनवरी 2024 को समाप्त हो रही थी। भूपेश बघेल की ओर से याचिका की प्रस्तुति, सत्यापन, हलफनामे और बाद में रजिस्ट्रेशन की तारीखों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
हाईकोर्ट ने शुरुआती स्तर पर मामला खत्म करने से किया इनकार
17 सितंबर 2026 के आदेश में हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की ओर से दाखिल आवेदन को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका को केवल बाद की रजिस्ट्रेशन तारीख के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। यह देखना जरूरी है कि याचिका वास्तव में कब और किस स्थिति में प्रस्तुत की गई थी तथा उस समय मौजूद कमियों की कानूनी प्रकृति क्या थी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों की सच्चाई पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया जा रहा है। आरोपों और उनके प्रभाव का फैसला आगे की न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
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पहले भी उठ चुका है याचिका की पोषणीयता का मुद्दा
पाटन चुनाव याचिका की पोषणीयता को लेकर पहले भी अदालत में आपत्तियां उठाई जा चुकी हैं। 15 जून 2026 के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिका में लगाए गए कुछ आरोप ऐसे हैं, जिनके परीक्षण के लिए साक्ष्य जरूरी होंगे और उन्हें केवल प्रारंभिक स्तर पर खत्म नहीं किया जा सकता।
इसके बाद भी संबंधित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट के 17 सितंबर के आदेश में इस पूर्व न्यायिक प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।
अब 5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने अब चुनाव याचिका को 5 अक्टूबर 2026 को आगे की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया है। इस तारीख को चुनाव याचिकाकर्ता विजय बघेल और उनके गवाहों के साक्ष्य दर्ज किए जाने हैं।
इसका मतलब है कि पाटन चुनाव विवाद अब केवल प्रारंभिक आपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मामले में साक्ष्यों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल अदालत ने न तो विजय बघेल की ओर से लगाए गए आरोपों को सही माना है और न ही उन्हें खारिज किया है। हाईकोर्ट ने केवल यह तय किया है कि चुनाव याचिका को इस चरण पर खत्म नहीं किया जा सकता और संबंधित मुद्दों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जरूरी है।
