‘स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव भी बन गए नर्स!’ MP नर्सिंग रजिस्ट्रेशन पोर्टल में महाफर्जीवाड़ा, दो फर्जी कागजों से जनरेट हो रहे सर्टिफिकेट
भोपाल। मध्य प्रदेश में बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज घोटाले की जांच अभी थमी भी नहीं थी कि अब नर्सिंग काउंसिल की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था में एक और बड़े फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। राज्य नर्सिंग काउंसिल के ऑनलाइन पोर्टल में इतनी गंभीर तकनीकी व प्रशासनिक खामी सामने आई है कि कोई भी व्यक्ति महज दो फर्जी दस्तावेज अपलोड करके किसी के भी नाम से नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और यूनिक नंबर हासिल कर सकता है। इस व्यवस्था की पोल तब खुली जब सूबे के उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह के नाम पर भी चंद मिनटों में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और नंबर जनरेट हो गए।
सिर्फ दो दस्तावेज और सीधे हाथ में सर्टिफिकेट
जांच और पड़ताल में सामने आया है कि काउंसिल द्वारा शुरू की गई नई ऑनलाइन प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। आवेदक को केवल ‘ट्रेनिंग कंप्लीशन’ और ‘डिग्री/डिप्लोमा’ का प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड करना होता है। इसके बाद बिना किसी ठोस सत्यापन के पोर्टल तत्काल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और नंबर जारी कर देता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नई व्यवस्था में संबंधित कॉलेज या संस्थान से आवेदन को फॉरवर्ड कराने या कॉलेज प्राचार्य से सत्यापित कराने की अनिवार्यता को ही खत्म कर दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री और आला अधिकारी के नाम पर जारी हुए रजिस्ट्रेशन
सिस्टम की इस भारी लापरवाही को उजागर करने के लिए जब स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य सुखबीर सिंह के नाम और काल्पनिक ब्योरे के साथ दो फर्जी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए गए, तो सिस्टम ने बिना किसी रुकावट के दोनों वरिष्ठ हस्तियों के नाम पर नर्सिंग काउंसिल का वैध दिखने वाला रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और नंबर जारी कर दिया। इससे साफ हो गया है कि कोई भी जालसाज बिना नर्सिंग पढ़े या फर्जी डिग्री के सहारे मिनटों में अधिकृत नर्सिंग सर्टिफिकेट हासिल कर सकता है।
पहले क्या थी व्यवस्था और अब कहां हुई चूक?
नर्सिंग काउंसिल की पुरानी व्यवस्था में फर्जीवाड़े की गुंजाइश न के बराबर थी। पहले की प्रक्रिया के तहत:
कॉलेज स्तरीय सत्यापन: कॉलेज प्राचार्य 10वीं, 12वीं, नर्सिंग कोर्स के प्रत्येक सत्र की मूल अंकसूची, अस्पताल की ट्रेनिंग कंप्लीशन और मूल डिग्री की गहन जांच करते थे।
सत्यापन के बाद ही आगे बढ़ता था फॉर्म: कॉलेज स्तर पर मुहर और हस्ताक्षर के बाद ही आवेदन काउंसिल को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा जाता था।
काउंसिल की स्क्रूटनी के बाद जारी होता था नंबर: काउंसिल की आंतरिक जांच पूरी होने के बाद ही रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता था।
परंतु नई ऑनलाइन व्यवस्था में इस पूरी कड़ी को उलट दिया गया है। अब सर्टिफिकेट और रजिस्ट्रेशन नंबर पहले ही जारी कर दिया जाता है, जबकि काउंसिल स्तर पर दस्तावेजों का कथित सत्यापन बाद के लिए छोड़ दिया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं और भर्तियों के लिए बड़ा खतरा
नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी और संविदा नर्सिंग भर्तियां होती हैं, उच्च शिक्षा में दाखिला मिलता है, नए नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी की नियुक्ति की जाती है और निजी अस्पतालों को मान्यता दी जाती है। यदि फर्जी दस्तावेजों के दम पर कोई भी अयोग्य व्यक्ति काउंसिल का नंबर हासिल कर लेगा, तो इससे न सिर्फ फर्जी फैकल्टी के दम पर अपात्र कॉलेज मान्यता ले लेंगे, बल्कि अस्पतालों में मरीजों की जान भी झोलाछाप या अयोग्य स्टाफ के हाथों खतरे में पड़ जाएगी। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
