देश की पहली LNG ट्रेन की ऐतिहासिक शुरुआत: पटरियों पर दौड़ा स्वच्छ ईंधन, जानिए रेलवे और पर्यावरण को क्या होंगे इसके बड़े फायदे

अहमदाबाद। भारतीय रेलवे को कार्बन मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से चलने वाली देश की पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह तकनीकी छलांग न केवल रेलवे के संचालन को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भारत के हरित भविष्य और आत्मनिर्भरता के संकल्प को भी नई ताकत देगी।

क्यों खास है एलएनजी (LNG) और रेलवे को क्या होंगे इसके लाभ?

पारंपरिक डीजल ईंधन की तुलना में एलएनजी को रेलवे के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। इसके प्रमुख लाभ और खूबियां निम्नलिखित हैं:

कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट और स्वच्छ पर्यावरण

डीजल इंजनों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती रहा है। एलएनजी एक बेहद स्वच्छ वैकल्पिक ईंधन है, जिसके जलने से सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर (पीएम स्तर) न के बराबर उत्सर्जित होते हैं। यह तकनीक ग्रीनहाउस गैसों के असर को घटाने और शहरों की आबोहवा सुधारने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

डीजल पर निर्भरता खत्म और विदेशी मुद्रा की बचत

भारत अपनी पेट्रोलियम और डीजल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहता है। एलएनजी तकनीक से रेलवे की डीजल खपत में भारी कटौती होगी। गृह मंत्री अमित शाह ने रेखांकित किया कि 2015-16 में रेलवे 293 करोड़ लीटर डीजल इस्तेमाल करता था, जो घटकर 108 करोड़ लीटर रह गया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक रेलवे की डीजल खपत को शून्य करने का है। एलएनजी का दायरा बढ़ने से देश की हजारों करोड़ रुपये की कीमती विदेशी मुद्रा बचेगी।

किफायती ईंधन और बेहतर परिचालन दक्षता

डीजल के मुकाबले एलएनजी की लागत काफी कम और स्थिर रहती है। इससे माल ढुलाई और यात्री परिवहन का संचालन खर्च घटेगा, जिससे भविष्य में ढुलाई लागत कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही एलएनजी इंजन का रखरखाव पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में अधिक सरल और टिकाऊ माना जाता है।

साबरमती से 1,472 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

इस ऐतिहासिक मौके पर गृह मंत्री ने साबरमती में 1,472 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेलवे परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि साबरमती वह पावन धरा है जहां से महात्मा गांधी ने सादा जीवन और ग्रामीण उत्थान के प्रयोग शुरू किए थे, और आज उसी धरा से पर्यावरण संरक्षण का एक नया मॉडल देश को मिल रहा है।

गृह मंत्री ने कहा कि 1980 के दशक में साबरमती स्टेशन से रिक्शा पाने के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, लेकिन आज यह स्टेशन मेट्रो, स्टेट बस और बुलेट ट्रेन जैसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब से जुड़ रहा है।

‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी तकनीक की मिसाल

अमित शाह ने जानकारी दी कि आज देश में बनने वाले रेलवे इंजनों में 94 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत तैयार हो रहा है, जिसे जल्द ही शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य है। इसके अलावा 1,200 हॉर्सपावर क्षमता वाले ट्विन-सेक्शन इंजन जैसे ताकतवर इंजन अब अकेले 600 ट्रकों के बराबर माल ढो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देश में रेलवे का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। शेष बचे नॉन-इलेक्ट्रिफाइड और संवेदनशील रेल मार्गों पर एलएनजी तथा हाइड्रोजन तकनीक देश को सबसे सुरक्षित, स्वच्छ और आत्मनिर्भर रेल नेटवर्क की वैश्विक कतार में सबसे आगे खड़ा करेगी।

Youthwings