निजी स्कूलों का अनोखा विरोध: असहयोग के बाद अब ‘गांधीगिरी’, शासन को भेजेंगे गुलाब और प्रेम-पत्र
छत्तीसगढ़ में CG Private Schools Protest ने अब एक नया और दिलचस्प मोड़ ले लिया है। पिछले डेढ़ महीने से असहयोग आंदोलन कर रहे प्रदेशभर के करीब 6800 निजी स्कूलों ने अब विरोध का तरीका बदलते हुए ‘गांधीगिरी’ अपनाने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत स्कूल संचालक शासन के प्रतिनिधियों को गुलाब भेंट करेंगे और प्रेमपूर्वक पत्र लिखकर अपनी मांगों को सामने रखेंगे। निजी स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वे अब टकराव के बजाय संवाद और शांति के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत 23 और 24 अप्रैल को पूरे प्रदेश में एक साथ यह अभियान चलाया जाएगा।
गांधीगिरी के जरिए जताएंगे विरोध
CG Private Schools Protest के तहत तय कार्यक्रम के अनुसार, 23 अप्रैल को सभी निजी स्कूल संचालक अपने-अपने स्कूल के लेटरहेड पर स्कूल शिक्षा मंत्री और शासन के अन्य प्रतिनिधियों को पत्र लिखेंगे। इन पत्रों में वे अपनी प्रमुख समस्याओं और मांगों का उल्लेख करेंगे। इसके बाद 24 अप्रैल को विभिन्न जिलों में स्कूल संचालक जनप्रतिनिधियों से मिलेंगे और उन्हें गुलाब भेंट करेंगे। इस दौरान वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और सकारात्मक तरीके से रखेंगे।

आरटीई फीस बढ़ाने की मुख्य मांग
CG Private Schools Protest का मुख्य मुद्दा आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति है। निजी स्कूलों का कहना है कि वर्ष 2012 में आरटीई लागू होने के बाद से अब तक फीस में कोई वृद्धि नहीं की गई है। स्कूल संचालकों के अनुसार, शिक्षा के खर्च में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाली राशि वही पुरानी है। इसी कारण वे 2016 से लगातार फीस बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन यह भी चाहता है कि सरकार शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले खर्च का आंकड़ा सार्वजनिक करे, ताकि उसी आधार पर निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि तय की जा सके।
पहले कर चुके हैं कई तरह के विरोध
CG Private Schools Protest के तहत निजी स्कूल पहले भी कई कदम उठा चुके हैं। एक मार्च से शुरू हुए असहयोग आंदोलन में उन्होंने आरटीई के तहत चयनित छात्रों को प्रवेश न देने का फैसला लिया था।
4 अप्रैल को यह निर्णय लिया गया कि लॉटरी से चयनित वंचित वर्ग के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके बाद 17 अप्रैल को शिक्षकों और स्कूल संचालकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।
18 अप्रैल को प्रदेशभर में कई निजी स्कूल बंद रखे गए, जिससे सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन प्रयासों के बाद भी कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
अब नई मांग भी जोड़ी गई
अब CG Private Schools Protest में एक नई मांग भी शामिल की गई है। पहले केवल आरटीई फीस बढ़ाने की मांग थी, लेकिन अब निजी स्कूल संघ ने प्री-प्राइमरी कक्षाओं—नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2—में भी आरटीई के तहत प्रवेश देने की मांग उठाई है।
दरअसल, सरकार ने इस सत्र से नियमों में बदलाव करते हुए केवल पहली कक्षा में ही आरटीई के तहत प्रवेश की अनुमति दी है। इससे प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश बंद हो गया है, जिससे निजी स्कूलों में नाराजगी बढ़ी है।
शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि वे किसी भी प्रकार के टकराव से बचना चाहते हैं और सरकार के साथ संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहते हैं। ‘गांधीगिरी’ CG Private Schools Protest के इस नए तरीके से वे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहते हैं, ताकि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा सके।कुल मिलाकर, CG Private Schools Protest अब एक ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां विरोध के साथ-साथ सकारात्मक संवाद और शांति का संदेश भी देखने को मिल रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पहल पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या निजी स्कूलों की मांगों को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।
