Gariaband Road Block Protest: क्षतिग्रस्त रपटा के विरोध में NH-130C पर चक्काजाम, प्रशासन के आश्वासन पर खत्म आंदोलन

Gariaband Road Block Protest

Gariaband Road Block Protest में ग्रामीणों ने NH-130C जाम किया। रपटा मरम्मत के लिखित आश्वासन के बाद शाम को खत्म हुआ आंदोलन।

Gariaband Road Block Protest के तहत छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त रपटा के विरोध में बड़ा आंदोलन किया। अमांड और आसपास के गांवों के लोगों ने सुबह 6 बजे से नेशनल हाइवे-130C पर चक्काजाम कर दिया, जिससे पूरे दिन आवागमन प्रभावित रहा।

शुरुआत ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही समस्या के कारण हुई। खराब रपटा और अधर में लटका पुल निर्माण कार्य लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है, खासकर मानसून के पहले यह मुद्दा और गंभीर हो गया है।

 

सुबह से ही हाईवे पर डटे रहे ग्रामीण

Gariaband Road Block Protest के दौरान सैकड़ों ग्रामीण जुगाड़ के पास नेशनल हाइवे पर एकत्रित हो गए। महिलाएं, पुरुष और युवा सभी सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लखेश्वरी नेताम कर रहे थे।

 

क्या है पूरा मामला

Gariaband Road Block Protest के पीछे मुख्य कारण पुलिया निर्माण में देरी और रपटा का टूटना है।

अमांड-देवझरामली मार्ग, जो नेशनल हाइवे से जुड़ता है, वहां वर्ष 2024 में विशेष केंद्रीय सहायता मद से 1.49 करोड़ रुपये की लागत से पुलिया निर्माण को मंजूरी मिली थी।

पीएमजीएसवाय विभाग ने इस कार्य के लिए ठेका कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी और 19 जनवरी 2025 को वर्क ऑर्डर जारी किया गया।

 

काम शुरू होने से पहले ही तोड़ा गया रपटा

Gariaband Road Block Protest में ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने फरवरी 2026 में काम शुरू करने से पहले ही पुराने रपटा को तोड़ दिया।

इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन उदंती अभयारण्य प्रशासन ने आवश्यक एनओसी नहीं होने का हवाला देकर काम रुकवा दिया।

इस कारण अब न तो पुल बना और न ही पुराना रपटा बचा, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई।

 

प्रशासनिक तालमेल की कमी आई सामने

Gariaband Road Block Protest ने प्रशासनिक समन्वय की कमी को उजागर किया है।

निर्माण कार्य शुरू करने से पहले अभयारण्य क्षेत्र में जरूरी अनुमति नहीं ली गई, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह लापरवाही सीधे तौर पर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है।

 

पहले वार्ता विफल, फिर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी

Gariaband Road Block Protest के दौरान स्थिति को संभालने के लिए पहले एसडीएम मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।

बाद में अपर कलेक्टर पंकज डाहरे, अभयारण्य उपनिदेशक पंकज जैन और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।

 

लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन

Gariaband Road Block Protest के दौरान करीब दो घंटे तक चली वार्ता के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया।

इस आश्वासन में कहा गया कि क्षतिग्रस्त रपटा की मरम्मत इसी सप्ताह से शुरू कर दी जाएगी और बारिश के बाद पुल निर्माण कार्य पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

इसके बाद शाम करीब 6 बजे ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया।

 

दिनभर बाधित रहा यातायात

Gariaband Road Block Protest का असर पूरे दिन यातायात पर देखने को मिला।

नेशनल हाइवे-130C पर दोनों ओर भारी वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्री बसों और निजी वाहनों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

कई लोगों को वैकल्पिक मार्ग के रूप में ओडिशा की ओर से घूमकर जाना पड़ा, जिससे यात्रा और लंबी हो गई।

 

Gariaband Road Block Protest

ग्रामीणों की मुख्य मांग

Gariaband Road Block Protest के दौरान ग्रामीणों ने साफ कहा कि बारिश से पहले रपटा की मरम्मत जरूरी है।

उनका कहना है कि यदि समय पर काम नहीं हुआ, तो मानसून के दौरान गांव पूरी तरह कट सकता है और बच्चों, मरीजों व महिलाओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी।

 

बारिश से पहले बढ़ी चिंता

Gariaband Road Block Protest ऐसे समय में हुआ है जब मानसून करीब है।

ग्रामीणों को डर है कि अगर जल्द मरम्मत नहीं हुई, तो हल्की बारिश में भी अस्थायी रास्ता बह सकता है और गांव का संपर्क पूरी तरह टूट सकता है।

 

स्थायी समाधान की जरूरत

Gariaband Road Block Protest यह दर्शाता है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा।

ग्रामीणों की मांग है कि पुल निर्माण कार्य को प्राथमिकता देकर जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

Gariaband Road Block Protest ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक छोटी सी लापरवाही ने ग्रामीणों को बड़े संकट में डाल दिया।

हालांकि प्रशासन ने लिखित आश्वासन देकर फिलहाल स्थिति को संभाल लिया है, लेकिन असली परीक्षा अब इस बात की होगी कि वादे को समय पर पूरा किया जाता है या नहीं।

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