Bastar Tendupatta Season 2026: हरा सोना लेकर आ रहा खुशहाली.. 1300 फड़ों में होगी खरीदी
बस्तर सर्किल में तेंदूपत्ता सीजन की तैयारी पूरी, सुकमा-बीजापुर-दंतेवाड़ा-बस्तर में 75 समितियां और 43 परिवहन समूह गठित
Bastar Tendupatta Season 2026 : क्या आपने सुना? बस्तर के जंगलों में इस बार हरा सोना बिखरने वाला है। हाँ, तेंदूपत्ता सीजन की शुरुआत से पहले वन विभाग ने कमर कस ली है। और इस बार की खास बात ये है कि रिकॉर्ड खरीदी की पूरी उम्मीद है।
बस्तर के जंगलों से निकलने वाला हरा सोना अब एक बार फिर हजारों परिवारों की जिंदगी में खुशहाली लेकर आने वाला है।
क्या है हरा सोना?
तेंदूपत्ता को बस्तर में ‘हरा सोना’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जंगलों से जुड़े हजारों परिवारों की सबसे बड़ी मौसमी आय का जरिया है। Tendupatta का उपयोग बीड़ी बनाने में होता है और यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में पाया जाता है।
संग्रहण के लिए 50-50 पत्तों की गड्डी बनाई जाती है और ऐसी 1000 गड्डियों से एक मानक बोरा तैयार होता है। राज्य सरकार फिलहाल प्रति मानक बोरा 5500 रुपए का भुगतान कर रही है, जिससे ग्रामीणों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
कितना है लक्ष्य?
बस्तर सर्किल के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और बस्तर जिले में इस वर्ष 2 लाख 70 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है। इनमें सबसे ज्यादा संग्रहण की उम्मीद बीजापुर जिले से की जा रही है, जहां जंगलों में तेंदूपत्ता की अच्छी पैदावार के संकेत मिले हैं।
अधिकारियों के मुताबिक इस बार मौसम अनुकूल है, ऐसे में उत्पादन बेहतर रहने और पिछले वर्षों के मुकाबले ज्यादा संग्रहण होने की संभावना है। यही वजह है कि वन विभाग ने पहले से ही खरीदी व्यवस्था को मजबूत कर दिया है।
खरीदी की तैयारी- 75 समितियां, 119 लॉट, 43 परिवहन समूह
Bastar Tendupatta Season 2026 : पूरे बस्तर सर्किल में 75 समितियों के माध्यम से 119 लॉट बनाए गए हैं, जहां संग्रहण कार्य संचालित होगा। वहीं Tendupatta को समय पर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए 43 परिवहन समूह भी गठित किए गए हैं।
इस बार ग्रामीण संग्राहकों की सुविधा बढ़ाने के लिए 10 नए फड़ भी जोड़े गए हैं। इनमें सुकमा में 2 और बीजापुर में 8 नए फड़ शामिल हैं। अब पूरे सर्किल में 1300 से अधिक फड़ संग्रहण कार्य के लिए सक्रिय रहेंगे।
सीधे बैंक खातों में पहुंचेगी राशि
Bastar Tendupatta Season 2026 : वन विभाग ने भुगतान व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को राशि सीधे उनके बैंक खातों में मिले, इसके लिए संग्राहक कार्ड को आधार से लिंक किया जा रहा है।
बीजापुर जिले में अब तक 53,608 परिवारों में से 51,818 परिवारों के बैंक खाते खुल चुके हैं, बाकी खातों की प्रक्रिया तेजी से जारी है। इससे ग्रामीणों को बिचौलियों के झंझट से मुक्ति मिलेगी और वे सीधा लाभ उठा सकेंगे।
कितना मिलेगा पैसा?
राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रति मानक बोरा 5500 रुपए का भुगतान कर रही है। पिछले वर्षों की तुलना में यह राशि काफी बढ़ी है, जिससे ग्रामीणों को अच्छी आय होने की उम्मीद है। अगर कोई संग्राहक 10 बोरे तेंदूपत्ता इकट्ठा करता है, तो उसे 55,000 रुपए की राशि सीधे उसके बैंक खाते में मिल जाएगी।
यह बस्तर के ग्रामीणों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि यह इलाका आज भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए संघर्ष कर रहा है।
बिना लेवी के होगा संग्रहण
Bastar Tendupatta Season 2026: स्पष्ट है कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद बिना लेवी वसूली के इस बार Tendupatta सीजन केवल खरीदी नहीं, बल्कि बस्तर के वनांचल में रोजगार, आय और उम्मीदों का नया दौर लेकर आने वाला है।
पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास कार्यों के चलते बस्तर के कई इलाके नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए हैं। अब ग्रामीण बिना किसी डर के तेंदूपत्ता संग्रहण कर सकते हैं और अपनी उपज को सीधा बेच सकते हैं।
संग्राहकों में उत्साह – बेहतर आय की उम्मीद
Bastar Tendupatta Season 2026 की शुरुआत से पहले ही बस्तर के ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस बार मौसम अच्छा है और जंगलों में पत्तों की भरमार है। सरकार द्वारा बढ़ाई गई भुगतान दर ने उनकी उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।
एक संग्राहक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘पहले नक्सली हमसे लेवी वसूलते थे, जिससे हमें कम पैसे मिलते थे। अब हमें पूरा पैसा सीधे खाते में मिलेगा, इससे हमारे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों में मदद मिलेगी।’
बस्तर में विकास की नई इबारत
तेंदूपत्ता संग्रहण का यह सीजन बस्तर के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है। जहां एक तरफ नक्सलवाद के कारण यह इलाका पिछड़ा रहा, वहीं अब सुरक्षा और विकास की नई राहें खुल रही हैं। आने वाले वर्षों में यदि यही गति बनी रही, तो बस्तर जल्द ही विकास की नई इबारत लिखेगा।
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