CG Youth Congress News: छत्तीसगढ़ कांग्रेस में फिर फूटा विवाद, युवा कांग्रेस की नियुक्ति सूची जारी होते ही रद्द, बढ़ी अंदरूनी कलह

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CG Youth Congress News: 7 विधानसभा अध्यक्षों की सूची पर बवाल, प्रदेश प्रभारी ने लिया यू-टर्न… बीजेपी ने साधा निशाना

CG Youth Congress News: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार गुटबाजी और संगठनात्मक विवादों से जूझ रही कांग्रेस में अब युवा कांग्रेस की नियुक्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

दरअसल, छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस ने हाल ही में 7 विधानसभा अध्यक्षों की सूची जारी की थी, लेकिन सूची जारी होने के कुछ ही देर बाद इसे रद्द कर दिया गया। इस फैसले ने पार्टी के भीतर चल रही अंतर्कलह को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

CG Youth Congress News: सूची जारी होते ही रद्द, संगठन में मचा हड़कंप

जानकारी के अनुसार, युवा कांग्रेस द्वारा 7 विधानसभा अध्यक्षों की नियुक्ति की सूची जारी की गई थी। लेकिन इस सूची को लेकर विवाद तब बढ़ गया जब युवा कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अमित पठानिया ने इसे तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया।

बताया जा रहा है कि सूची जारी करने से पहले तीन विधानसभा अध्यक्षों के नामों को लेकर उचित अनुमति (एप्रूवल) नहीं लिया गया था, जिसके चलते यह स्थिति बनी।

प्रदेश अध्यक्ष का बयान- जल्द आएगी पूरी सूची

इस पूरे मामले पर युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि सभी विधानसभा अध्यक्षों की सूची एक साथ जारी की जानी थी। उन्होंने बताया कि फिलहाल 7 नामों वाली सूची को रोका गया है और जल्द ही पूरी और अंतिम सूची जारी की जाएगी।

आकाश शर्मा ने यह भी कहा कि इसे विवाद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक प्रक्रियात्मक सुधार है।

CG Youth Congress News: पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस संगठन में इस तरह का विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और बूथ अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर इसी तरह के विवाद और असंतोष देखने को मिले थे।

बार-बार सामने आ रहे इन मामलों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर समन्वय की कमी बनी हुई है।

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बीजेपी ने कसा तंज

इस मुद्दे पर बीजेपी विधायक सुनील सोनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में कांग्रेस का अस्तित्व कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी कई गुटों में बंटी हुई है और वरिष्ठ नेताओं के दबाव में फैसले लिए जाते हैं।

सुनील सोनी ने कहा कि जब सूची वरिष्ठ नेताओं की इच्छा के अनुसार नहीं बनती, तो उसे दबाव बनाकर रद्द करवा दिया जाता है, जो कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को दर्शाता है।

क्या संकेत देती है यह स्थिति?

लगातार सामने आ रहे ऐसे विवाद यह साफ संकेत दे रहे हैं कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस अभी भी संगठनात्मक एकजुटता बनाने में संघर्ष कर रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इन आंतरिक मतभेदों को कैसे सुलझाती है और संगठन को किस तरह मजबूत करती है।

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