पाकिस्तान के F-16 के परखच्चे उड़ाने वाले हीरो अभिनंदन ने छोड़ी एयरफोर्स: अब प्राइवेट पैसेंजर प्लेन उड़ाते दिखेंगे वीर चक्र विजेता!
नई दिल्ली। साल 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी लड़ाकू विमान F-16 को डॉगफाइट में ढेर करने वाले भारतीय वायु सेना के जांबाज पायलट और वीर चक्र विजेता ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। ग्रुप कैप्टन अभिनंदन ने भारतीय वायु सेना (IAF) से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्ति ले ली है। आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार रक्षा मंत्रालय से विधिवत अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने के बाद उन्होंने कमर्शियल एविएशन का रुख किया है और देश की उभरती रीजनल एयरलाइन ‘Fly91’ के साथ अपनी नई पेशेवर पारी की शुरुआत की है।
क्या फाइटर पायलट उड़ा सकते हैं पैसेंजर प्लेन? जानिए नियम
अभिनंदन वर्धमान के कमर्शियल एविएशन में कदम रखने की खबर के बाद यह सवाल चर्चा में है कि क्या लड़ाकू विमान उड़ाने वाले पायलट सीधे तौर पर यात्री विमान उड़ा सकते हैं? नियमों के मुताबिक, वायु सेना में लंबी सेवा और हजारों घंटों की उड़ान का अनुभव रखने वाले फाइटर पायलटों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के निर्धारित मानकों को पूरा करना होता है। इसके तहत आवश्यक सिविल एविएशन परीक्षाएं, मेडिकल टेस्ट और संबंधित कमर्शियल एयरक्राफ्ट का टाइप-रेटिंग प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किया जाता है, जिसके बाद वे यात्री विमान उड़ाने के पात्र बनते हैं।
27 फरवरी 2019 की वह ऐतिहासिक डॉगफाइट
मिलिट्री एविएशन के इतिहास में ग्रुप कैप्टन अभिनंदन का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों के बलिदान के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। अगले दिन 27 फरवरी को जब पाकिस्तानी वायु सेना ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की हिमाकत की, तो तत्कालीन विंग कमांडर अभिनंदन अपने मिग-21 बाइसन के साथ उनका मुकाबला करने पहुंचे। महज 35 वर्ष की आयु में उन्होंने विंटेज मिग-21 से आधुनिक अमेरिकी एफ-16 विमान को डॉगफाइट में मार गिराकर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को चकित कर दिया था।
60 घंटे की कस्टडी, अटूट हौसला और ‘वीर चक्र’ सम्मान
डॉगफाइट के दौरान मिसाइल की चपेट में आने पर अभिनंदन को इजेक्ट करना पड़ा और वे नियंत्रण रेखा (LoC) के पार गिरे, जहां पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने गजब का संयम और साहस दिखाया। भारत के कड़े कूटनीतिक दबाव, सैन्य तैयारियों और वैश्विक हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तान को झुकना पड़ा और 1 मार्च 2019 को करीब 60 घंटे बाद उन्हें वाघा बॉर्डर के रास्ते सकुशल भारत लौटाया गया। राष्ट्र सेवा में अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पदक ‘वीर चक्र’ से अलंकृत किया था।
