NHAI टोल प्लाजा फर्जीवाड़े में ED का बड़ा एक्शन; 7 राज्यों के 14 ठिकानों पर छापेमारी
लखनऊ। नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स वसूली के नाम पर कथित तौर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को 1.03 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी के अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कथित अनधिकृत सॉफ्टवेयर से संबंधित फॉरेंसिक सबूत मिले हैं।
टोल वसूली के लिए बनाया गया था कथित फर्जी सिस्टम
ईडी की जांच में आरोप सामने आया है कि NHAI के आधिकारिक टोल सिस्टम के समानांतर एक अलग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस कथित सिस्टम को टोल ऑपरेटरों और आईटी कर्मचारियों की मिलीभगत से चलाए जाने की बात कही गई है। इस व्यवस्था के जरिए हाईवे से गुजरने वाले वाहनों से टोल वसूला जाता था। आरोप है कि ओवरलोडेड कमर्शियल वाहनों से होने वाली वसूली को भी इस अनधिकृत सिस्टम के माध्यम से दर्ज किया जाता था।
सरकारी रिकॉर्ड में पहुंचता था सिर्फ 5 फीसदी हिस्सा
जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित फर्जीवाड़े में टोल से वसूली गई रकम का केवल लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा ही आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता था। बाकी करीब 95 प्रतिशत रकम को कथित तौर पर निजी और बेनामी बैंक खातों में भेज दिया जाता था। ईडी अब इन्हीं वित्तीय लेनदेन की जांच करते हुए पूरी मनी ट्रेल का पता लगाने में जुटी है।
UP STF की FIR के बाद सामने आया मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स की ओर से दर्ज एफआईआर से हुई। जांच के दौरान NHAI के रिकॉर्ड और तकनीकी फॉरेंसिक जांच में कथित तौर पर एक समानांतर और अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। इसके बाद ईडी ने PMLA, 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया और कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों तथा उनके वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू की।
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छापेमारी में कई अहम डिजिटल सबूत मिले
ईडी की तलाशी में सर्वर डेटा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ कथित फर्जी FASTag रसीदें और बैंक खातों से संबंधित जानकारी भी हासिल हुई है। एजेंसी ने संदिग्ध बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं। इन सभी दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की अब जांच की जा रही है, ताकि कथित फर्जी टोल वसूली की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की भूमिका सामने आ सके।
कौन थे नेटवर्क के पीछे? जांच में जुटी ED
ईडी अब इस मामले में सिर्फ टोल ऑपरेटरों की भूमिका नहीं देख रही है। एजेंसी कथित तौर पर आईटी कर्मचारियों, बिचौलियों और अन्य संबंधित लोगों के बीच पैसे के लेनदेन की भी जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित तौर पर सरकारी राजस्व से निकाली गई रकम आखिर किन लोगों तक पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में मुख्य लाभार्थी कौन थे।
मनी ट्रेल से खुलेगा पूरे नेटवर्क का राज
जांच एजेंसी जब्त किए गए बैंक रिकॉर्ड, सर्वर डेटा और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से मिले साक्ष्यों को आपस में जोड़ रही है। इसके जरिए कथित अवैध रकम के स्रोत से लेकर उसके अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
