युक्तियुक्तकरण के 6 माह बाद भी नई पोस्टिंग में गैरहाज़िरी, बर्खास्ती की तैयारी!
रायपुर जिले में शिक्षक युक्तियुक्तकरण को लगभग छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन 11 मिडिल स्कूल शिक्षक और 9 प्राइमरी स्कूल शिक्षक अभी तक अपनी नई पोस्टिंग वाले स्कूलों में जॉइनिंग नहीं दे पाए हैं। इन शिक्षकों के अभ्यावेदन (आपत्तियां) अमान्य घोषित हो चुके हैं, फिर भी वे नए स्कूलों में पदभार ग्रहण नहीं कर रहे। इससे ग्रामीण और एकल शिक्षकीय स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को संयुक्त संचालक (जेडी) आरपी आदित्य ने इन शिक्षकों के खिलाफ जांच दल गठित कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। जांच पूरी होने के बाद कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बर्खास्तगी (डिसमिसल) तक की अनुशंसा शामिल हो सकती है।
युक्तियुक्तकरण की पृष्ठभूमि
शासन के आदेश पर जून 2025 में रायपुर जिले में शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया था। इसमें शहर और आसपास के स्कूलों में अतिरिक्त पदस्थ शिक्षकों को शिक्षक विहीन, एकल शिक्षकीय या दूर-दराज के स्कूलों में स्थानांतरित किया गया। जिले में कुल करीब 750 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण हुआ।
कई शिक्षकों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया, जहां कुछ को अंतरिम राहत मिली। हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला और संभाग स्तरीय कमेटी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किए गए। लेकिन मिडिल स्कूल के 11 शिक्षकों और प्राइमरी स्कूल के 9 शिक्षकों को कोई राहत नहीं मिली। उनके आवेदन अमान्य कर दिए गए।
शिक्षकों पर पहले से रोक लगी, अब बर्खास्तगी की तैयारी
इन शिक्षकों का वेतन पहले से ही रोका जा चुका है। इसके बावजूद वे नए स्कूलों में उपस्थित नहीं दर्ज करा रहे। जेडी ने स्पष्ट किया कि निलंबन (सस्पेंशन) से शिक्षकों को फायदा होता है, क्योंकि निलंबन के दौरान वे वेतन पा सकते हैं। इसलिए सीधे बर्खास्तगी या क्रैक सर्विस (सेवा से हटाने) की अनुशंसा की जा सकती है।
प्राइमरी स्कूल के 9 शिक्षकों के मामले में भी डीईओ को जांच दल गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जेडी ने डीईओ को कहा है कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, इसलिए जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
शिक्षकों में हड़कंप, पढ़ाई प्रभावित
इन शिक्षकों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ाई बाधित हो रही है। अभिभावक और छात्र संगठनों ने भी शिकायत की है कि शिक्षक अनुपस्थित रहने से बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। जेडी का कहना है कि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शिक्षकों की समान वितरण और स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना है। जो शिक्षक आदेश का पालन नहीं कर रहे, उनके खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।
प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद शासन को प्रतिवेदन भेजा जाएगा, जिसमें बर्खास्तगी की सिफारिश शामिल हो सकती है। शिक्षकों को अंतिम मौका देते हुए जल्द जॉइनिंग देने की अपील की गई है, अन्यथा कार्रवाई अपरिहार्य होगी।
