कोयले के दाम में 40% तक उछाल, स्पंज आयरन और सरिया पर बढ़ सकता है असर; उद्योगों की बढ़ी चिंता
रायपुर। मानसून के दौरान कोयले की सप्लाई प्रभावित होने से छत्तीसगढ़ के स्पंज आयरन उद्योगों की लागत बढ़ने लगी है। उद्योग संचालकों के मुताबिक, लिंकेज के जरिए जरूरत के मुताबिक कोयला नहीं मिलने के कारण अब बाजार से ज्यादा मात्रा में कोयला खरीदना पड़ रहा है। खुले बाजार में कोयले की कीमत करीब 40 फीसदी तक बढ़ने का दावा किया जा रहा है। इसका सीधा असर स्पंज आयरन की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है और आने वाले समय में सरिया की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
6,500 से बढ़कर 9,500 रुपए टन हुआ कोयला
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, जिस कोयले की कीमत पहले करीब 6,500 रुपए प्रति टन थी, वह अब बढ़कर लगभग 9,500 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है। यानी खुले बाजार में कीमत में करीब 3 हजार रुपए प्रति टन तक का अंतर आया है।
मानसून के दौरान कई कोयला खदानों में पानी भरने और उत्पादन-सप्लाई प्रभावित होने का असर उद्योगों तक पहुंचने वाली आपूर्ति पर पड़ा है। वहीं, कोयला उपलब्धता में पावर सेक्टर को प्राथमिकता मिलने से स्पंज आयरन उद्योगों को लिंकेज के तहत पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं मिल पा रहा है।
20-25% से बढ़कर 70-75% कोयला बाजार से खरीदने का दावा
छत्तीसगढ़ में करीब 80 स्पंज आयरन उद्योग संचालित होने की जानकारी दी गई है। उद्योगों को एसईसीएल से लिंकेज के जरिए कोयला मिलता है। उद्योग संचालकों का कहना है कि सामान्य स्थिति में भी उन्हें अपनी कुल जरूरत का 100 फीसदी कोयला लिंकेज से नहीं मिल पाता और करीब 20 से 25 फीसदी जरूरत खुले बाजार से पूरी करनी पड़ती है।
वर्तमान स्थिति में यह निर्भरता बढ़कर करीब 70 से 75 फीसदी तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। इससे उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ रहा है।
स्पंज आयरन की लागत में 20% तक बढ़ोतरी
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, एक टन स्पंज आयरन के उत्पादन में करीब 1.6 टन कोयले की जरूरत होती है। ऐसे में महंगे कोयले की खरीद से उत्पादन लागत में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की बात कही जा रही है।
फिलहाल स्पंज आयरन की कीमत करीब 28 हजार रुपए प्रति टन बताई जा रही है। उद्योग संचालकों का कहना है कि यदि कोयले की कीमत और सप्लाई की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में उत्पाद की कीमत बढ़ सकती है।
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उद्योग संगठन ने भी जताई चिंता
छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन के अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार मंडल के मुताबिक, उद्योगों को लिंकेज के तहत काफी कम मात्रा में कोयला मिल रहा है। खुले बाजार में कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। उनका कहना है कि इसका असर आगे स्पंज आयरन की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
सरिया की कीमतों पर भी पड़ सकता है असर
स्पंज आयरन महंगा होने का असर सरिया की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना है। वर्तमान में सरिया की बेसिक कीमत करीब 42 हजार रुपए प्रति टन बताई गई है। अलग-अलग एमएम के हिसाब से कीमत में अंतर के बाद यह करीब 48 हजार रुपए तक पहुंचती है। 18 फीसदी जीएसटी जोड़ने पर प्लांट स्तर की कीमत करीब 56,640 रुपए बताई गई है।
थोक बाजार में इसकी कीमत करीब 58 हजार और खुदरा बाजार में करीब 60 हजार रुपए प्रति टन तक बताई जा रही है। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, आने वाले समय में सरिया की कीमतों में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना है।
विदेशी कोयला भी हुआ महंगा
सरिया बनाने वाली रोलिंग मिलों में इस्तेमाल होने वाले विदेशी कोयले की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। उद्योग पक्ष के मुताबिक, इंडोनेशिया से आने वाला कोयला पहले करीब 12 हजार रुपए प्रति टन था, जो अब बढ़कर लगभग 16 हजार रुपए प्रति टन हो गया है।
ऐसे में सरिया उद्योग पर दोहरा लागत दबाव पड़ रहा है। एक तरफ स्पंज आयरन की कीमत बढ़ने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर रोलिंग मिलों के लिए इस्तेमाल होने वाला विदेशी कोयला भी महंगा हो गया है।
