‘काजी कैंप पर मिसाइल’ वाले बयान से दहकी भोपाल की सियासत: रामेश्वर शर्मा की सफाई पर कांग्रेस का पलटवार-‘इस्लामाबाद में ऐसा कोई मोहल्ला ही नहीं’
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र से अक्सर अपने आक्रामक और तीखे तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामेश्वर शर्मा एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में हैं। जन्माष्टमी के एक सार्वजनिक उत्सव के दौरान उनके मुंह से निकला एक विवादास्पद जुमला अब सूबे की सियासत में भूचाल लेकर आया है। बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जहां विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की सोची-समझी साजिश करार दिया है, वहीं चौतरफा घिरे विधायक की सफाई ने इस पूरे विवाद को और अधिक पेचीदा बना दिया है।
क्या था विधायक का वह बयान, जिस पर मचा है बवाल?
जन्माष्टमी के मंच से जनता को संबोधित करते हुए विधायक रामेश्वर शर्मा देश की रक्षात्मक और तकनीकी प्रगति का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि जब हिंदुस्तान के लोग कहते थे कि हम सुई बनाना भी नहीं जानते, तब मोदी जी ने कहा कि हम मिसाइल बनाएंगे। बात यहीं तक सीमित रहती तो शायद यह एक सामान्य राजनीतिक भाषण होता, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि करोंद के चौराहे पर मिसाइल लगा दो और काजी कैंप पर गिरा दो।
यह वाक्य जैसे ही मंच से निकला, वहां मौजूद लोगों में तो चर्चा का विषय बना ही, लेकिन जब इसका वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आया, तो इसने राजनीतिक गलियारों में आग लगा दी। आलोचकों और विपक्षी नेताओं ने इसे भोपाल के स्थानीय मुस्लिम बहुल इलाके ‘काजी कैंप’ पर सीधा हमला और घृणा फैलाने वाला बयान करार दिया।
चौतरफा घिरे तो देनी पड़ी सफाई, लेकिन कांग्रेस ने खोल दी पोल
बयान तूल पकड़ता देख और चौतरफा चौतरफा घिरने के बाद विधायक रामेश्वर शर्मा ने अपनी सफाई पेश करने में देर नहीं लगाई। उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए दावा किया कि उनके कहने का आशय भोपाल के काजी कैंप से नहीं, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित काजी कैंप से था, जहां से देश विरोधी गतिविधियों का संचालन होता है।
हालांकि, विधायक की यह सफाई टिक नहीं पाई। कांग्रेस पार्टी के नेशनल मीडिया कोऑर्डिनेटर अब्बास हाफिज ने इंटरनेट और गूगल मैप्स का हवाला देते हुए तीखा पलटवार किया। अब्बास हाफिज ने चुनौती देते हुए कहा कि हमने पूरे इंटरनेट और गूगल पर छानबीन कर ली है, लेकिन पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ‘काजी कैंप’ नाम का कोई भी इलाका, मोहल्ला या ठिकाना मौजूद नहीं है। विधायक जी अपनी इस बयानबाजी से जनता को गुमराह न करें। यह बयान सीधे तौर पर भोपाल के एक विशेष समुदाय और विशेष इलाके को निशाना बनाकर दिया गया है, जो बेहद निंदनीय है।
ध्रुवीकरण के दांव और राजनीतिक नफा-नुकसान की इनसाइड स्टोरी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर मध्य प्रदेश की राजनीति में वैचारिक और सांप्रदायिक बयानबाजी की धार को तेज कर दिया है। चुनावी सरगर्मी और त्योहारों के मौसम में ऐसे बयानों का आना महज जुबान फिसलना नहीं, बल्कि सोचे-समझे वैचारिक एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा है।
एक तरफ जहां कांग्रेस इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से भुनाने की फिराक में है और प्रदेश सरकार से विधायक के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग कर रही है, वहीं भाजपा संगठन फिलहाल इस मामले में आधिकारिक तौर पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचता नजर आ रहा है। देखना यह होगा कि बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच सत्तापक्ष इस विवाद पर क्या अंतिम राजनीतिक दांव चलता है।
