सागर में बिकी ‘मौत’, भोपाल में मचा सियासी कोहराम: सवालों के घेरे में आबकारी तंत्र, क्या टूटेगा माफिया-अफसर सिंडिकेट?
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले अंतर्गत बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र के ग्राम नौराज और गूगरा खुर्द में कथित जहरीली शराब पीने से 9 लोगों की संदिग्ध मौत ने सूबे के प्रशासनिक और सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस दिल दहला देने वाले घटनाक्रम के बाद जहां प्रशासन आनन-फानन में 7 शराब दुकानों को सील कर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग में जुटा है, वहीं राजधानी भोपाल में इस मुद्दे ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस ने सरकार के ‘सुशासन’ के मॉडल को कटघरे में खड़ा करते हुए इसे कमीशनखोरी और माफिया-अफसर गठजोड़ का नतीजा करार दिया है, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने साफ कर दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
नौराज और गूगरा खुर्द से भोपाल तक पहुंची तपिश
सागर जिले के ग्रामीण इलाकों में जैसे ही जहरीली शराब से मौतों का आंकड़ा बढ़ना शुरू हुआ, संभागायुक्त, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भारी पुलिस बल के साथ सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। अस्पताल में भर्ती मरीजों की गंभीर हालत और बढ़ती मौतों के बाद प्रशासन ने पिछले 48 घंटों में शराब पीने वाले ग्रामीणों से तत्काल सिविल अस्पताल पहुंचकर मेडिकल स्क्रीनिंग कराने की सार्वजनिक अपील जारी की। एहतियात के तौर पर क्षेत्र की 7 देशी-विदेशी शराब दुकानों को सील कर सैंपलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन प्रशासनिक सक्रियता से पहले ही यह मामला सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग में तब्दील हो चुका है।
कांग्रेस की चौतरफा घेराबंदी: न्यायिक जांच और 24 घंटे का अल्टीमेटम
घटना सामने आते ही मध्य प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह हमलावर हो गई है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर सीधा वार करते हुए आरोप लगाया कि पूरे मध्य प्रदेश पर शराब माफियाओं का कब्जा हो चुका है। पटवारी ने मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग करते हुए 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अतीत की घटनाओं की याद दिलाते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया। सिंघार ने सवाल दागा, “उज्जैन और मुरैना में जब पहले ऐसी दुखद घटनाएं हो चुकी थीं, तो सरकार ने सबक क्यों नहीं लिया? क्या आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन को इस समानांतर और अवैध कारोबार की भनक नहीं थी? यह जहरीला धंधा सीधे तौर पर सिस्टम में व्याप्त कमीशनखोरी का परिणाम है।”
इधर, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी तीखा तंज कसते हुए कहा कि अगर पिछली घटनाओं से नसीहत ले ली गई होती, तो आज बुंदेलखंड में यह मातम न पसरा होता। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मांग दोहराई और आरोप लगाया कि अवैध शराब का पूरा नेटवर्क अफसरों के संरक्षण में फल-फूल रहा है। पार्टी ने स्थानीय नेताओं और विधायकों की एक विशेष टीम को तुरंत पीड़ित परिवारों से मिलकर जमीनी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का पलटवार: ‘दोषियों को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे’
विपक्ष के तीखे हमलों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हालात की गंभीरता को देखते हुए आपात निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने बंडा-शाहगढ़ की घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार ने जिले के प्रभारी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजा है और दोषियों के खिलाफ ऐसी नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की जाएगी जिसे भुलाया न जा सके।
वहीं, आबकारी विभाग का जिम्मा संभाल रहे उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए कड़ा संदेश दिया। देवड़ा ने कहा, “यह अत्यंत दुखद और अक्षम्य अपराध है। मैंने खुद कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से पूरी रिपोर्ट ली है और आबकारी आयुक्त को मौके पर भेजा गया है। इस हादसे के पीछे चाहे कितना भी रसूखदार व्यक्ति क्यों न हो, सरकार किसी को नहीं छोड़ेगी।”
चुनाव और साख के बीच फंसा आबकारी विभाग
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सागर का यह घटनाक्रम केवल एक अवैध शराब का मामला नहीं है, बल्कि यह मोहन यादव सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा बन गया है। बुंदेलखंड का यह इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है, जहां से लंबे समय से अवैध और नकली शराब की तस्करी के आरोप लगते रहे हैं। अब 9 मौतों के बाद जब विपक्ष ने सीधे मंत्रालय तक उंगलियां उठाई हैं, तो सरकार पर केवल छोटे सप्लायरों को पकड़ने का नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे बैठे असली सिंडिकेट और लापरवाह आबकारी अफसरों पर निर्णायक हथौड़ा चलाने का भारी राजनीतिक दबाव बन गया है।
