इंडोनेशिया में ज्वालामुखी का विस्फोट: आसमान में 50 हजार फीट उठी राख, 5 हवाईअड्डे ठप; 500 से अधिक उड़ानें प्रभावित
जकार्ता। इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच स्थित सुंडा जलडमरूमध्य में रविवार तड़के प्रसिद्ध ‘अनक क्राकाटोआ’ ज्वालामुखी अचानक भीषण विस्फोट के साथ फट पड़ा। ज्वालामुखी से निकली घनी राख और जहरीली गैसों का गुबार पश्चिमी इंडोनेशिया के विस्तृत भूभाग में फैल गया। इसके चलते राजधानी जकार्ता के प्रमुख सोएकार्नो-हत्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे सहित कई अन्य प्रमुख हवाईअड्डों का एयरस्पेस पूरी तरह बंद करना पड़ा। विस्फोट के कारण रविवार दोपहर तक कुल 516 उड़ानों का संचालन ठप हो गया, जिससे 22 हजार से अधिक हवाई यात्रियों का सफर प्रभावित हुआ है।
50 हजार फीट ऊंचाई तक पहुंचा राख का गुबार, सैटेलाइट तस्वीरों ने दी चेतावनी
इंडोनेशियाई भूवैज्ञानिक एजेंसी के अनुसार, ज्वालामुखी में बीते शुक्रवार से ही हलचल दर्ज की जा रही थी। रविवार सुबह 3 बजकर 53 मिनट पर करीब 30 सेकंड तक एक तीव्र विस्फोट हुआ, जिसके बाद क्रेटर से तेजी से दहकता लावा बाहर आने लगा। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में आसमान में राख के दो विशालकाय बादल दर्ज किए गए। पहला गुबार करीब 20,000 फीट (6,100 मीटर) की ऊंचाई तक पहुंचकर जकार्ता, बांतन और पश्चिमी जावा की तरफ बढ़ा, जबकि दूसरा अधिक शक्तिशाली गुबार 50,000 फीट (15,200 मीटर) तक उठकर बांतन, लांपुंग, बेंगकुलु और हिंद महासागर के व्यापक क्षेत्र में फैल गया।
जकार्ता से बाली तक एविएशन सेक्टर पर भारी असर
राख और धूल के घने बादलों के कारण विमानों के इंजनों को होने वाले खतरे को देखते हुए उड्डयन प्राधिकरण ने जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को शाम 5:30 बजे तक पूरी तरह बंद रखने का निर्देश दिया। यहां की अकेले 202 उड़ानें रद्द या डायवर्ट की गईं, जिससे 22,800 यात्री हवाईअड्डे पर ही अटक गए। इसके अलावा जकार्ता के हलीम परदानाकुसुमा, लांपुंग के रादिन इंतेन द्वितीय एयरपोर्ट सहित चार अन्य हवाईअड्डों पर परिचालन बंद रहा। बाली के इगुस्ती न्गुराह राय और मेदान हवाईअड्डे की उड़ानों पर भी इस आपदा का सीधा प्रभाव पड़ा।
क्रेटर से 3 किलोमीटर का दायरा प्रतिबंधित
ज्वालामुखी निगरानी केंद्र के विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई माह से सक्रिय इस ज्वालामुखी का यह अब तक का सबसे जोरदार विस्फोट था, जो दर्शाता है कि इसके गर्भ में मैग्मा और गैसों का दबाव लगातार बना हुआ है। हालांकि, इस घटना में अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है और न ही तटीय बस्तियों को खाली कराने का आदेश दिया गया है। फिर भी, प्रशासन ने सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह प्रतिबंधित घोषित करते हुए लोगों को जहरीली गैसों और गिरते गर्म पत्थरों से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी है।
1883 के महाविनाश और 2018 की घातक सुनामी का इतिहास
‘अनक क्राकाटोआ’ का शाब्दिक अर्थ ‘क्राकाटोआ का बच्चा’ होता है। यह उसी ऐतिहासिक क्राकाटोआ ज्वालामुखी का हिस्सा है, जिसके 1883 में हुए महाविस्फोट ने दुनिया भर के मौसम चक्र को हिला दिया था और वैश्विक तापमान में गिरावट ला दी थी। इसके अलावा, वर्ष 2018 में इसी अनक क्राकाटोआ के फटने के बाद समुद्र के भीतर भीषण भूस्खलन हुआ था, जिससे उठी सुनामी ने सुमात्रा और जावा में 430 से अधिक जिंदगियां लील ली थीं। उस भयावह हादसे में इस द्वीप का दक्षिण-पश्चिमी हिस्सा ढह गया था और द्वीप का आकार घटकर एक-चौथाई रह गया था। विशेषज्ञ फिलहाल स्थिति की चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं।
