सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: भरभराकर गिरी 6 मंजिला इमारत: 6 लोगों की मौत; 10 लोगों को बचाया गया, PG मालिक पर FIR
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक पुरानी छह मंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसा इतना भीषण था कि पूरी इमारत कुछ ही पलों में मलबे में तब्दील हो गई। इस बिल्डिंग में करीब 75 बेड का पेइंग गेस्ट (PG) संचालित किया जा रहा था, जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते थे। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 10 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। रेस्क्यू किए गए लोगों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रशासन को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोग फंसे हो सकते हैं। ऐसे में NDRF, दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस और अन्य एजेंसियों की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
दोपहर में अचानक ढह गई इमारत
अधिकारियों के अनुसार, हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। जिस इमारत में यह दुर्घटना हुई, वह करीब 40 से 50 साल पुरानी बताई जा रही है। बिल्डिंग में एक बेसमेंट और उसके ऊपर पांच मंजिलें थीं। हादसे के समय इमारत के निचले हिस्से में मरम्मत का काम चल रहा था। शुरुआती जांच में पुलिस ने आशंका जताई है कि मरम्मत के दौरान किए गए काम से बिल्डिंग की संरचना प्रभावित हुई होगी। हालांकि, इमारत गिरने की सटीक वजह का पता विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा।
75 बेड वाले PG में रहते थे छात्र
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के आसपास का प्रमुख छात्र क्षेत्र है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले छात्र PG और किराये के कमरों में रहते हैं।
जिस इमारत के ढहने की घटना हुई, उसमें करीब 75 बेड की क्षमता वाला PG चल रहा था। हादसे के बाद यह चिंता बढ़ गई कि घटना के समय कितने छात्र और अन्य लोग इमारत के भीतर मौजूद थे।
स्थानीय विधायक अनिल शर्मा के मुताबिक, कुछ लोगों की ओर से मलबे के अंदर से फोन किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे बचाव दलों को मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका है।
हरिराम समेत अन्य के खिलाफ FIR दर्ज
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने कथित PG मालिक हरिराम समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
पुलिस के अनुसार, साउथ कैंपस थाने में FIR नंबर 153/26 दर्ज की गई है। मामले में BNS की धारा 105/290/125(a) के तहत कार्रवाई की गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत में मरम्मत का काम किस तरह किया जा रहा था और क्या इस दौरान निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें बनाई गई हैं।
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NDRF और फायर टीमों ने संभाला मोर्चा
इमारत गिरने की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और DDMA की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। राहत कार्य के लिए फायर टेंडर और CATS एंबुलेंस भी मौके पर भेजी गईं।
बचावकर्मी भारी मलबे को धीरे-धीरे हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। ऑपरेशन के दौरान आसपास की इमारतों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जा रहा है। एहतियात के तौर पर हादसे से सटी इमारत को भी खाली करा लिया गया है।
CM रेखा गुप्ता ने बताया बेहद चिंताजनक हादसा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में हुई घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले पर लगातार नजर रख रही है और सभी संबंधित एजेंसियां आपसी तालमेल के साथ बचाव कार्य में जुटी हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक DDMA, NDRF, दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें प्रभावित लोगों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता देना सरकार की प्राथमिकता है।
PM मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
प्रधानमंत्री की ओर से कहा गया कि प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं तथा प्रभावित लोगों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से बातचीत कर हादसे के बाद की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने केंद्र की ओर से हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
जेपी नड्डा ने AIIMS के निदेशक समेत केंद्र सरकार के अस्पतालों को जरूरत पड़ने पर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इमारत की उम्र और मरम्मत की भी होगी जांच
पुलिस की शुरुआती जांच में इमारत की उम्र करीब 40 से 50 वर्ष सामने आई है। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि पुरानी इमारत में किस तरह का मरम्मत कार्य कराया जा रहा था और क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी।
फिलहाल बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मलबे में किसी और के दबे होने की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। हादसे की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगी।
