US Iran Peace Deal: IRGC बोला- ‘अमेरिका-इजराइल के पास सरेंडर के अलावा कोई चारा नहीं बचा था’, 14 शर्तों पर तय हुआ शांति समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने डील पूरी होने का किया ऐलान, होर्मुज जलडमरूमध्य हुआ खोलने का आदेश

US Iran peace deal : अमेरिका और ईरान के बीच 14 शर्तों पर ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है। इस समझौते के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि यह अमेरिका और इजराइल की करारी हार है। IRGC के अनुसार, अमेरिका के सामने इसके अलावा कोई चारा नहीं था। ईरानी सेना ने इस ऐतिहासिक डील को अपनी बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत के रूप में देखा है। यह समझौता पिछले कई महीनों से चल रही जंग को विराम देगा।

 IRGC का बयान – ‘अमेरिका-इजराइल के पास सरेंडर के अलावा कोई चारा नहीं था’

ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने दावा किया है कि देश की जनता और सशस्त्र बलों ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मन के पास सरेंडर करने के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। बयान में कहा गया, ‘हमारी सेना के सामने यूएस और इजराइल लाचार नजर आए। उन्होंने हमारी सेना के सामने हार मान ली है। उनके सामने इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं था।’ इस बयान को काफी अहम माना जा रहा है। ईरानी मीडिया ने भी इस समझौते को अपनी जीत के तौर पर पेश किया है।

बयान में आगे कहा गया कि MoU का मतलब दुश्मन देश पर भरोसा करना बिल्कुल भी नहीं है, हम अमेरिका पर पूरी नजर बनाए रखेंगे। तेहरान ने शांति समझौते को MoU नाम दिया है। ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने अपने ‘ईश्वरीय और इस्पाती इरादे’ से अमेरिकी और ज़ायोनी दुश्मनों को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया।

 14 शर्तों पर समझौता – होर्मुज जलडमरूमध्य खोला जाएगा

खबरों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच 14 शर्तों पर सहमति बनी है। इन शर्तों के तहत कई मोर्चों पर सैन्य अभियानों को समाप्त करने पर सहमति हुई है। सबसे अहम बात यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने पर सहमति बनी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि दुनिया के जहाज फिर से आवाजाही शुरू कर सकते हैं।

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय ने बताया कि इस्लामाबाद वार्ता के बाद यह समझौता हुआ है। इसके तहत लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियान तुरंत और हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। समझौता ज्ञापन पर 19 जून को आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे।

ट्रंप का ऐलान – ‘डील पूरी हुई, होर्मुज खुला, तेल बहेगा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शांति समझौते के पूरा होने की पुष्टि की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, “ईरान के साथ डील अब पूरी हो चुकी है। सभी को बधाई हो। मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को शुल्क-मुक्त खोलने का पूर्ण अधिकार देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल हटाने का आदेश देता हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल को बहने दो!”  ट्रंप के इस ऐलान के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल देखी जा रही है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं चाहता है और अमेरिका समुचित समय पर ईरान से समृद्ध यूरेनियम को हटाने में मदद करेगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह प्रक्रिया जल्दी, आसानी और सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ी, तो उनके पास ‘अंतिम विकल्प’ मौजूद है।

पाकिस्तान ने की पुष्टि – 19 जून को जेनेवा में होंगे हस्ताक्षर

मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। उन्होंने कहा, “गहन वार्ता के बाद, हम यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामिक गणराज्य के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा की है।” आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में होगा।

पाकिस्तान, कतर और कुवैत ने इस समझौते में मध्यस्थता के प्रयासों के लिए सराहना प्राप्त की है। शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान को संघर्ष का राजनयिक समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्धता जताने पर धन्यवाद दिया।

समझौते का पाठ होगा जारी, 60 दिन की वार्ता

ईरान के उप विदेश मंत्री काज़म घरीबाबादी ने कहा है कि समझौते का पूरा पाठ औपचारिक हस्ताक्षर समारोह के बाद जारी कर दिया जाएगा। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच 60 दिनों की और वार्ता होगी, जिसमें ईरान के खिलाफ प्रतिबंध हटाने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित करने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

हालांकि, इस समझौते पर इजराइल और IRGC के कट्टरपंथियों दोनों ओर से नाराजगी भी जताई जा रही है। इजराइली अधिकारियों ने इस डील को ‘बकवास’ बताते हुए चिंता जताई है कि यह समझौता इजराइल की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। वहीं, ईरान के कट्टरपंथी विधायकों का कहना है कि इस समझौते में तेहरान ने बहुत अधिक रियायतें दी हैं।

फिलहाल, सभी की निगाहें 19 जून को होने वाले ऐतिहासिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं।

 

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