Illegal Liquor : इस गांव में शराब के कारण नहीं हो रहीं शादियां, गांव वालों ने खोला मोर्चा

कुरूद ब्लॉक के कल्ले गांव में अवैध शराब बिक्री से गांव की छवि खराब हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।
Dhamtari Illegal Liquor : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक गांव की सामाजिक व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। कुरूद विकासखंड के ग्राम कल्ले में पिछले कई वर्षों से अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि गांव के युवाओं की शादियां तक रुक गई हैं और गांव की पहचान नशे के अड्डे के रूप में होने लगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और आबकारी विभाग को कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि अब गांव के लोग खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
10 साल से चल रहा अवैध शराब का कारोबार
इसका सबसे बड़ा कारण गांव में लंबे समय से चल रहा अवैध शराब का धंधा बताया जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले करीब 10 वर्षों से गांव में खुलेआम शराब बेची जा रही है। गांव की गलियों में दिन-रात शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। नशे में धुत लोग सार्वजनिक स्थानों पर गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करते नजर आते हैं।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि शराब की वजह से सामाजिक माहौल पूरी तरह खराब हो चुका है और इसका सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ रहा है।
शादी-ब्याह पर पड़ा गहरा असर
ग्रामीणों का कहना है कि दूसरे गांवों के लोग अब कल्ले गांव में रिश्ता जोड़ने से बच रहे हैं। जब गांव के युवक के लिए रिश्ता लेकर परिवार दूसरे गांव जाते हैं, तो सामने से यह कहकर मना कर दिया जाता है कि “जिस गांव में शराब का तांडव हो, वहां बेटी नहीं भेजेंगे।”
वहीं दूसरी तरफ, यदि किसी लड़की के लिए लड़के वाले गांव में आते हैं, तो वे भी गांव की बदनाम छवि देखकर रिश्ता ठुकरा देते हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गांव के कई युवाओं की उम्र निकलती जा रही है, लेकिन रिश्ते तय नहीं हो पा रहे।
माता-पिता की बढ़ी चिंता
परिजनों का कहना है कि वे अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं, लेकिन गांव की खराब छवि उनके सपनों को तोड़ रही है। कई परिवारों का कहना है कि शराब की वजह से गांव की सामाजिक प्रतिष्ठा खत्म होती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है और नशे का माहौल नई पीढ़ी को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
ग्रामीण पहुंचे कलेक्ट्रेट
इसे लेकर अब ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
गांव के बड़ी संख्या में लोग जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों के साथ सरपंच जया संदीप डहरिया, भागी राम साहू, स्मृति यादव समेत कई लोग मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार पुलिस और आबकारी विभाग को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
“अब आर-पार की लड़ाई” की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि गांव में अवैध शराब बिक्री नहीं रोकी गई, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। लोगों ने धरना और चक्काजाम तक की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब वे गांव का भविष्य बर्बाद होते नहीं देख सकते और किसी भी कीमत पर अवैध शराब के कारोबार को बंद कराना चाहते हैं।

प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि इतने लंबे समय से अवैध शराब बिक्री होने के बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग ने सख्ती नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो गांव की यह स्थिति नहीं बनती।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में गांव में इतने वर्षों से अवैध शराब का कारोबार चलता रहा।
अपर कलेक्टर ने क्या कहा
इस मामले में अपर कलेक्टर Indira Naveen Singh ने कहा कि ग्रामीणों ने गांव में अवैध शराब बिक्री की शिकायत की है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के आवेदन को पुलिस अधीक्षक (SP) के पास भेजा जाएगा और मामले में जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर कार्रवाई देखना चाहते हैं।
सामाजिक ताने-बाने पर असर
यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह गांव के सामाजिक ढांचे को भी प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी क्षेत्र की पहचान अपराध, नशा या अवैध गतिविधियों से जुड़ जाती है, तो उसका असर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक रिश्तों पर भी पड़ता है।
कल्ले गांव में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां शराब के कारण सामाजिक विश्वास और पारिवारिक रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं।
युवाओं का भविष्य खतरे में
इसका सबसे ज्यादा असर गांव के युवाओं पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक कई युवा नशे की लत में फंसते जा रहे हैं। वहीं जिन युवाओं ने खुद को इस माहौल से दूर रखा है, उन्हें भी गांव की बदनामी का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
युवाओं का कहना है कि वे चाहते हैं कि गांव की पहचान बदलें और यहां का माहौल फिर से सामान्य हो।
इससे साफ है कि अवैध शराब सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बड़ा खतरा है। कल्ले गांव में शराब के कारण टूटते रिश्ते और बिगड़ता सामाजिक माहौल प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। अब लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि क्या गांव को इस समस्या से राहत मिल पाएगी या नहीं।
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