भारत में आज से BRICS Meeting, मिडिल ईस्ट संकट पर होगी बड़ी चर्चा, क्या अमेरिका की बढ़ेगी टेंशन?

BRICS Meeting India 2026: दिल्ली में जुटे दुनिया के बड़े देश, ईरान-रूस समेत कई विदेश मंत्री पहुंचे
दिल्ली में शुरू हो रही BRICS बैठक में मिडिल ईस्ट संकट, तेल सप्लाई और वैश्विक ताकतों का समीकरण बदल सकता है… क्या इस बार अमेरिका को मिलेगा बड़ा झटका? जानिए पूरी खबर
भारत में BRICS बैठक की शुरुआत, वैश्विक नजरें दिल्ली पर
भारत की राजधानी दिल्ली में आज से BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक शुरू हो रही है। वैश्विक कूटनीति के लिहाज से यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा संकट और वैश्विक संतुलन जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होने वाली है।
इस बैठक में शामिल होने के लिए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव समेत कई देशों के शीर्ष नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात, तय होगा एजेंडा
भारत इस साल BRICS का अध्यक्ष है और इसी के तहत यह बैठक आयोजित की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, बैठक के पहले दिन सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात करेंगे।
इस बैठक में सितंबर में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन का एजेंडा भी तय किया जाएगा। ऐसे में यह बैठक भविष्य की रणनीति और वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
मिडिल ईस्ट संकट पर होगा बड़ा मंथन
इस बार BRICS बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात और उसके चलते वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर पड़ रहे असर पर चर्चा हो सकती है।
ईरान ने भारत से अपील की है कि वह इस संकट को कम करने के लिए अपनी स्वतंत्र और संतुलित भूमिका निभाए। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद ईरानी विदेश मंत्री की यह पहली भारत यात्रा है, जिससे इस बैठक की अहमियत और बढ़ गई है।

BRICS क्यों बन रहा है ताकतवर मंच?
BRICS दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक शक्तिशाली संगठन बन चुका है। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, लेकिन अब इसका दायरा काफी बढ़ चुका है।
हाल के वर्षों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई जैसे देश भी इसमें शामिल हुए हैं, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसका हिस्सा बना।
आज BRICS:
- दुनिया की करीब 49.5% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है
- वैश्विक GDP का लगभग 40% हिस्सा रखता है
- विश्व व्यापार में करीब 26% योगदान देता है
यानी यह संगठन अब सिर्फ एक आर्थिक समूह नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला मंच बन चुका है।
ट्रंप को क्यों लग सकती है ‘मिर्ची’?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump BRICS के सबसे बड़े आलोचकों में से एक माने जाते हैं। वह इस संगठन को अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखते हैं।
ट्रंप की ‘America First’ नीति के तहत उनका मानना है कि BRICS जैसे समूह अमेरिका के बाजार का फायदा उठाते हैं, लेकिन रणनीतिक मामलों में उसका साथ नहीं देते।
उन्हें यह भी आशंका है कि चीन BRICS के जरिए विकासशील देशों को अमेरिका के खिलाफ एकजुट करने की कोशिश कर रहा है। खास तौर पर ईरान जैसे देशों के शामिल होने से उनकी चिंता और बढ़ गई है।
चीन की सीमित मौजूदगी, दिलचस्प संकेत
जहां एक ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप चीन के दौरे पर बीजिंग में मौजूद हैं, वहीं BRICS बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल नहीं हो रहे हैं।
उनकी जगह भारत में चीनी राजदूत इस बैठक में हिस्सा लेंगे। इसे कूटनीतिक नजरिए से एक अहम संकेत माना जा रहा है, जो वैश्विक समीकरणों की ओर इशारा करता है।

क्या बनेगी सर्वसम्मति?
BRICS Meeting से सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सदस्य देश पश्चिम एशिया संकट पर एक साझा बयान जारी कर पाएंगे।
पिछली BRICS Meeting में ईरान और यूएई के बीच मतभेद के कारण कोई सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी। ऐसे में इस बार भी यह चुनौती बनी हुई है कि क्या सभी देश एकमत होकर कोई ठोस रणनीति तैयार कर पाएंगे।
दिल्ली में हो रही BRICS Meeting सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन की दिशा तय कर सकती है।
मिडिल ईस्ट संकट, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर होने वाली यह चर्चा दुनिया के कई देशों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या BRICS देश मिलकर कोई मजबूत संदेश दे पाते हैं और क्या इससे वैश्विक मंच पर अमेरिका की स्थिति को चुनौती मिलती है।