अमेरिका में अब्दुल की जीत पर ओवैसी का बड़ा बयान, बोले- अब यूपी के अब्दुल की बारी

अब्दुल अल-सैयद

नई दिल्ली। अमेरिका के मिशिगन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद की चुनावी जीत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ भारत में भी नई बहस छेड़ दी है। उनकी जीत पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को राजनीतिक पहचान मजबूत करने का संदेश दिया है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जिस तरह मिशिगन में एक अब्दुल ने जीत हासिल की है, उसी तरह उत्तर प्रदेश के अब्दुल को भी अपनी सियासी ताकत पहचाननी होगी।

‘एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया, अब यूपी के अब्दुल की बारी’

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने पोस्ट में लिखा, “एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को भी अपनी सियासी पहचान मज़बूत करनी होगी। संघियों ने ‘अब्दुल’ को एक तंज़ में बदलने की बहुत कोशिश की है। वक़्त आ गया है कि हम दिखाएं कि अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की ग़ुलामी नहीं करता। अब दरी नहीं बिछाएंगे।”

ओवैसी के इस बयान को अमेरिकी चुनाव में अल-सैयद की जीत से जोड़कर भारत में मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पहचान की बहस के रूप में देखा जा रहा है।

कौन हैं अब्दुल अल-सैयद?

अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद मिस्र-अमेरिकी मूल के डॉक्टर और प्रगतिशील विचारधारा वाले नेता हैं। मिशिगन की राजनीति में उनकी पहचान एक मुखर नेता के रूप में रही है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के खिलाफ चुनावी मुकाबले में जीत का दावा किया है। उनकी इस सफलता को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम बताया जा रहा है।

चुनावी अभियान के दौरान अल-सैयद को कई विवादित टिप्पणियों और इस्लामोफोबिक हमलों का सामना करना पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें निशाना बनाया और ‘जिहादी’ तक कहा। एक रैली में ट्रंप ने उन पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अल-सैयद सीनेट में जाने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरने वाले इकलौते सीनेटर होंगे।

अपनी ही पार्टी के भीतर भी मिली चुनौती

अल-सैयद के लिए चुनावी सफर आसान नहीं रहा। उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर भी विरोध का सामना करना पड़ा। अगस्त में मिशिगन के डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में उनसे हारने वाली हेली स्टीवंस ने पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन किया था। इसके बावजूद अल-सैयद ने अपना चुनावी अभियान जारी रखा और जीत का दावा किया।

जीत के बाद कॉरपोरेट ताकतों पर साधा निशाना

चुनावी जीत के बाद अपने संबोधन में अल-सैयद ने अमेरिका की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट कंपनियों और अरबपतियों के प्रभाव ने व्यवस्था को आम लोगों के बजाय खास हितों के पक्ष में कर दिया है।

उन्होंने महंगाई और आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर देश में लोगों के लिए राशन खरीदना, गाड़ी में पेट्रोल भरवाना, घर लेना और डॉक्टर से इलाज कराना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए।

अल-सैयद ने सरकारी टैक्स के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जनता का पैसा लोगों और उनके बच्चों की बेहतरी पर खर्च होना चाहिए, न कि दूसरे देशों के बच्चों पर बम गिराने में। उन्होंने कहा कि अमेरिका की असली महानता अपनी कमियों को छिपाने में नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने का साहस दिखाने में है।

अल-सैयद की चुनावी सफलता के बाद जहां अमेरिकी राजनीति में उनके विचारों की चर्चा हो रही है, वहीं भारत में ओवैसी के बयान ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई सियासी बहस शुरू कर दी है।

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