मैं मैदान में होता तो… मिडटर्म में हार के बाद बोले ट्रंप, नतीजों को किया स्वीकार
वॉशिंगटन। दुनिया भर की निगाहों के केंद्र में रहे अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के शुरुआती नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को तगड़ा राजनीतिक झटका दिया है। अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी (democratic party) ने बहुमत हासिल कर लिया है और 50 सीटों के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है। वहीं, 435 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा यानि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी डेमोक्रेट्स (democratic party) मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। चुनाव परिणामों के रुझान स्पष्ट होते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार स्वीकार कर ली है और विपक्ष के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।
‘मैं नतीजे स्वीकार करने को तैयार हूं’: ट्रंप का बदला रुख
अमेरिकी मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे इन जनादेशों और नतीजों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ट्रंप ने कहा, “हम डेमोक्रेट्स (democratic party) के साथ काम करेंगे और उनके साथ मिलकर आगे बढ़ने को उत्सुक हैं। हम संभवतः देशहित में कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे।” हालांकि, इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि वे खुद चुनावी मैदान में नहीं थे, अगर वे होते तो पार्टी भारी बहुमत से जीत दर्ज करती। इसके अलावा उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा कि वे अब एक राजनीतिक विश्लेषक की तरह उम्मीदवारों की जीत और हार के कारणों का निष्पक्ष आकलन करेंगे।
सीनेट और हाउस में डेमोक्रेट्स की वापसी
राष्ट्रपति चुनाव के ठीक दो साल बाद हुए इन मिडटर्म चुनावों को राष्ट्रपति ट्रंप के दो वर्षों के कार्यकाल पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा था। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 राज्यों में गवर्नर पदों के लिए मतदान हुआ था। 435 सदस्यों वाले निचले सदन में बहुमत के लिए 218 सीटों की आवश्यकता होती है। रुझानों और अनुमानों के मुताबिक डेमोक्रेट्स (democratic party) 218 के आंकड़े की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी पिछड़ती दिख रही है।
ट्रंप के बाकी दो साल के कार्यकाल की राह क्यों हुई मुश्किल?
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अभी दो साल शेष हैं। संसद के उच्च सदन पर डेमोक्रेट्स (democratic party) का नियंत्रण स्थापित होने और निचले सदन में भी उनकी मजबूत स्थिति बनने से ट्रंप प्रशासन के लिए विधायी राह बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगी। राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप अपने फैसलों विशेषकर इमिग्रेशन, व्यापार टैरिफ और रक्षा बजट को जिस आक्रामक अंदाज में लागू करते रहे हैं, अब उस पर अमेरिकी संसद का कड़ा नियंत्रण और निगरानी रहेगी। बहुमत के अभाव में अब ट्रंप प्रशासन को कोई भी बड़ा कानून या नीतिगत प्रस्ताव पारित कराने के लिए विपक्षी डेमोक्रेट्स के साथ अनिवार्य रूप से राजनीतिक तालमेल बिठाना पड़ेगा।
