बांग्लादेश में मजदूरों का प्रदर्शन, 670 कारखाने बंद; क्या भारत के कारोबार पर भी पड़ेगी आंच?
नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में गारमेंट क्षेत्र के श्रमिकों का आंदोलन अब हिंसक रूप अख्तियार कर चुका है। न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी की मांग को लेकर हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें हो रही हैं। इस बीच, भारत सरकार ने पड़ोसी देश के बिगड़ते आंतरिक हालात को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश के मौजूदा घटनाक्रमों और सुरक्षा हालात पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है।
सड़कों पर गाड़ियों में आगजनी, आंसू गैस और लाठीचार्ज
राजधानी ढाका समेत प्रमुख औद्योगिक केंद्रों मीरपुर, आशुलिया, गाजीपुर और नारायणगंज में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर उग्र हुए प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख राजमार्गों को जाम कर दिया और कई वाहनों में तोड़फोड़ की। कुछ स्थानों पर पुलिस वैन में आग लगा दी गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े, पानी की बौछारें करनी पड़ीं और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। हालात बेकाबू होते देख गाजीपुर समेत कई संवेदनशील औद्योगिक इलाकों में ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ (BGB) की अतिरिक्त टुकड़ियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
बीजीएमईए का आंकड़ा: 670 कारखानों पर लटके ताले
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, इस उग्र आंदोलन के चलते ढाका, गाजीपुर और मध्य मयमनसिंह क्षेत्र में रजिस्टर्ड करीब 4,000 कपड़ा कारखानों में से 670 से अधिक इकाइयों को काम बंद करना पड़ा है। आंदोलनरत श्रमिकों की मुख्य मांग है कि उनका मौजूदा न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर सीधे 30,000 टका किया जाए। चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक देश है। करीब 40 लाख से अधिक कामगारों वाला यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा आय की सबसे मजबूत रीढ़ माना जाता है, जिसके ठप पड़ने से भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
राजनीतिक साजिश का आरोप: अवामी लीग पर सवाल
इस बीच अंतरिम प्रशासन ने इस अशांति के पीछे राजनीतिक साजिश होने का आरोप लगाया है। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग से जुड़े कुछ कारखाना मालिक और पूर्व सांसद जानबूझकर मजदूरों को भड़काकर अशांति फैला रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा, जबकि औद्योगिक इलाकों में शांति बहाल करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की गश्त तेज कर दी गई है।
