दिल्ली की हवा में घुलेगा पाकिस्तान का धुआं? AQI 324 पार, पंजाब में भारत से 4.2 गुना ज्यादा आग के मामले, बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। दिल्ली-NCR की हवा पहले से ही जहरीली बनी हुई है। सर्दियों की दस्तक के साथ प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इस बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान से आ रही एक रिपोर्ट ने पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। सैटेलाइट आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के शुरुआती 29 दिनों में पाकिस्तान के पंजाब में भारतीय पंजाब के मुकाबले 4.2 गुना अधिक फायर स्पॉट दर्ज किए गए हैं। आशंका है कि वहां से उठने वाला धुआं उत्तर-पश्चिमी हवाओं के जरिए भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है और दिल्ली-NCR की प्रदूषित हवा को और खराब कर सकता है।
पाकिस्तान के पंजाब में 13 हजार से ज्यादा फायर स्पॉट
पर्यावरण निगरानी वेबसाइट HamariHawa के विश्लेषण के अनुसार, NASA के सैटेलाइट ने 1 से 29 अक्टूबर 2026 के बीच पाकिस्तान के पंजाब में कुल 13,241 फायर स्पॉट रिकॉर्ड किए। वहीं, इसी अवधि में भारतीय पंजाब में इनकी संख्या 3,158 रही। यानी पाकिस्तान के पंजाब में भारतीय पंजाब की तुलना में करीब 4.2 गुना ज्यादा आग के स्थान दर्ज हुए।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान में दर्ज कुल फायर स्पॉट में से 6,655 अकेले अक्टूबर के आखिरी सात दिनों में सामने आए। 29 अक्टूबर को स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रही, जब एक ही दिन में 1,327 फायर स्पॉट दर्ज किए गए। ये आंकड़े क्षेत्र में खेतों में कृषि अवशेष जलाने की बढ़ती गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, सैटेलाइट पर दर्ज हर आग को पराली जलाने की घटना मानना सही नहीं होगा।
2019 में भारत आगे था, अब पाकिस्तान में ज्यादा आग के निशान
HamariHawa के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2019 में भारतीय पंजाब में 14,002 फायर स्पॉट दर्ज किए गए थे, जबकि पाकिस्तान के पंजाब में यह आंकड़ा 2,908 था। उस समय भारत के पंजाब में पाकिस्तान की तुलना में लगभग पांच गुना ज्यादा आग के मामले सामने आए थे।
लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच भारतीय पंजाब में सैटेलाइट से दर्ज फसल जलाने के मामलों में करीब 95 प्रतिशत की कमी आई। दूसरी तरफ पाकिस्तान के पंजाब में 2019 से 2025 के बीच फायर स्पॉट की संख्या में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वर्ष 2025 में पाकिस्तान के पंजाब में 12,364 फायर स्पॉट मिले, जबकि भारतीय पंजाब में इनकी संख्या 3,714 रही। यानी पाकिस्तान के पंजाब में करीब 3.3 गुना अधिक आग के निशान दर्ज किए गए। हालांकि, भारत में कमी आने के बावजूद पराली जलाने की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
ओकारा में सबसे ज्यादा आग, लाहौर के आसपास भी बढ़ा खतरा
पाकिस्तान के पंजाब में पराली जलाने की गतिविधियां मुख्य रूप से धान की खेती वाले इलाकों में केंद्रित हैं। HamariHawa के विश्लेषण के मुताबिक, अक्टूबर के शुरुआती 29 दिनों में ओकारा में सबसे ज्यादा 2,144 फायर स्पॉट दर्ज किए गए। इसके बाद गुजरांवाला में 1,011 और ननकाना साहिब में 1,003 आग के स्थान रिकॉर्ड हुए।
धान की कटाई के बाद खेतों को जल्दी खाली करने के लिए कृषि अवशेषों में आग लगाने की घटनाएं सामने आती हैं। इससे वातावरण में धुआं और PM2.5 जैसे बेहद छोटे प्रदूषक कण फैलते हैं। लाहौर और आसपास के इलाकों में पहले से ही स्मॉग की समस्या गंभीर है। ऐसे में हवाओं के जरिए प्रदूषित हवा के दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचने की आशंका भी बढ़ रही है।
क्या पाकिस्तान से दिल्ली पहुंचेगा जहरीला धुआं?
दिल्ली के प्रदूषण में हवाओं की दिशा अहम भूमिका निभाती है। उत्तर-पश्चिमी हवाएं पाकिस्तान के पंजाब और भारत के पंजाब-हरियाणा के इलाकों से होकर दिल्ली की तरफ आ सकती हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में पराली जलने से निकलने वाला धुआं और प्रदूषक कण लंबी दूरी तय कर दिल्ली-NCR तक पहुंच सकते हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने पंजाब और हरियाणा के कृषि क्षेत्रों से प्रदूषित हवा दिल्ली की ओर पहुंचाई। हालांकि, पाकिस्तान के पंजाब में लगी हर आग का धुआं सीधे दिल्ली तक पहुंचेगा, ऐसा निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता। इसका वास्तविक प्रभाव हवा की रफ्तार, दिशा, ऊंचाई और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
बारिश नहीं हुई तो दिल्ली की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे केवल पराली का धुआं जिम्मेदार नहीं है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां भी हवा को प्रदूषित करती हैं। सर्दियों में तापमान गिरने और हवा की गति कम होने से प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक जमा रहते हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण होने वाली बारिश वातावरण में मौजूद कुछ प्रदूषक कणों को कम करने में मदद कर सकती है। लेकिन IMD के उपलब्ध पूर्वानुमान के मुताबिक, 3 से 6 नवंबर तक दिल्ली में मुख्य रूप से साफ आसमान रहने और बारिश की कोई चेतावनी नहीं होने से तत्काल राहत की संभावना सीमित है।
दिल्ली का AQI 324, 5 नवंबर तक बहुत खराब हवा का अनुमान
3 नवंबर को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 324 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। वहीं, 31 अक्टूबर को AQI 117 था। कुछ ही दिनों के भीतर प्रदूषण के स्तर में आई यह तेजी राजधानी के लिए चिंता का विषय है।
IITM के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली की हवा 5 नवंबर तक बहुत खराब श्रेणी में बनी रह सकती है। वहीं, पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का योगदान 3 नवंबर को करीब 8.5 प्रतिशत से बढ़कर 5 नवंबर तक 22 प्रतिशत होने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, ये पूर्वानुमान हैं और वास्तविक योगदान मौसम तथा स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के आधार पर बदल सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ सकता है स्वास्थ्य जोखिम
बढ़ते वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है। PM2.5 के सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इससे खांसी, सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और अस्थमा की समस्या बढ़ सकती है।
प्रदूषण का स्तर अधिक रहने पर खुले में व्यायाम करने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला N95 मास्क इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है। साथ ही बच्चों और बुजुर्गों को लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से बचाना जरूरी है।
सीमा पार का धुआं या स्थानीय प्रदूषण, दिल्ली के लिए दोहरी चुनौती
पाकिस्तान के पंजाब में बढ़ते फायर स्पॉट ने दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता को लेकर एक नई चिंता जरूर पैदा की है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण सीमा पार से आने वाला प्रदूषण दिल्ली की मुश्किलें बढ़ा सकता है। लेकिन राजधानी की जहरीली हवा के लिए केवल पाकिस्तान में पराली जलाने को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
भारत के अपने कृषि क्षेत्रों में पराली जलाना, वाहनों का उत्सर्जन, उद्योगों का धुआं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण के बड़े कारण हैं। ऐसे में दिल्ली-NCR को साफ हवा दिलाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग और पराली प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
