‘क्लीन एनर्जी में 20 लाख करोड़ रुपये के अवसर’: भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट में बोले PM नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026’ का उद्घाटन किया। शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दशक के अंत तक भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश अवसर तैयार होंगे। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में देश ने इस क्षेत्र में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है, जबकि 2024 की री-इन्वेस्ट समिट के बाद से अब तक करीब 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है।
ऊर्जा सुरक्षा और निर्धारित लक्ष्यों की उपलब्धि
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुरक्षा का सीधा नाता देश की आर्थिक सुरक्षा से है और इसका भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में सुरक्षित है। वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की मजबूत आर्थिक रफ्तार का श्रेय उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी में किए गए दूरदर्शी निवेश को दिया। उन्होंने जानकारी दी कि पेरिस समझौते के तहत 2030 तक 50% स्थापित बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का जो लक्ष्य रखा गया था, उसे भारत ने 2025 में ही हासिल कर लिया। वर्तमान में देश 300 गीगावॉट क्षमता पार कर चुका है और भारत अब दुनिया के शीर्ष तीन नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक देशों में शामिल है।
ग्रीन हाइड्रोजन और ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य सिर्फ सौर और पवन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत दशक के अंत तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की ओर अग्रसर है। उन्होंने हाल ही में शुरू की गई देश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन का भी जिक्र किया। इसके अलावा, ऊर्जा के कुशल वितरण के लिए ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर’ को मजबूत किया जा रहा है, जिसके अगले चरण में करीब ₹2 लाख करोड़ का निवेश प्रस्तावित है, जिससे ‘वन नेशन, वन पावर ग्रिड’ के जरिए देश के कोने-कोने तक बिजली पहुंचाई जा सकेगी।
मैन्युफैक्चरिंग बूम और रोजगार के नए आयाम
घरेलू विनिर्माण की प्रगति का ब्योरा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले देश की सोलर मॉड्यूल क्षमता मात्र 2 गीगावॉट थी, जो आज बढ़कर 200 गीगावॉट से ऊपर पहुंच चुकी है, वहीं सोलर सेल उत्पादन क्षमता 40 गीगावॉट हो गई है। उन्होंने कहा कि सोलर हार्डवेयर, बैटरी स्टोरेज और सर्विसिंग के विस्तार से देश के युवाओं के लिए लाखों ‘ग्रीन जॉब्स’ तैयार हो रही हैं। वैश्विक स्तर पर भारत अपनी विशेषज्ञता साझा कर रहा है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के जरिए अफ्रीका सोलर फैसिलिटी के लिए 20 करोड़ डॉलर का प्रस्ताव भी रखा गया है।
