महादेव सट्टा एप गैंग में बड़ी टूट! सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद करीबियों ने बदला पाला, संपत्तियों पर कब्जे की चर्चा
रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब इस कथित सट्टा नेटवर्क के भीतर खींचतान की खबरें सामने आ रही हैं। चर्चा है कि सौरभ की गिरफ्तारी के बाद उसके कई करीबी और कारोबारी साझेदारों ने उससे दूरी बना ली है। रवि उप्पल समेत कई साझेदारों के अलग होने की खबर है। वहीं, अनिल अग्रवाल उर्फ अतुल और शुभम सोनी सहित कुछ अन्य लोगों के भी रवि उप्पल के साथ जाने की चर्चा है। ऐसे में महादेव सट्टा एप के कथित नेटवर्क में अंदरूनी वर्चस्व की लड़ाई की बातें तेज हो गई हैं।
सट्टे की कमाई और संपत्तियों को लेकर विवाद की चर्चा
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच कथित तौर पर सट्टे से हुई कमाई और संपत्तियों पर कब्जे को लेकर विवाद की चर्चा है। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों ने शेयर बाजार, खदानों, होटलों और बड़ी कंपनियों में निवेश किया था। हालांकि, इन निवेशों और संपत्तियों के बंटवारे को लेकर सामने आ रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां पहले से ही इस कथित आर्थिक साम्राज्य और पैसों के लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं।
136 दिन ओमान पुलिस की हिरासत में रहा सौरभ
महादेव सट्टा एप मामले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया है। बताया जा रहा है कि वह करीब 136 दिनों तक ओमान पुलिस की हिरासत में रहा। इस दौरान उसके प्रत्यर्पण और भारत वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इसी मामले में एक कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का मामला भी सामने आया है, जिस पर ‘अजंता मेंडिस’ नाम दर्ज होने की बात कही जा रही है।
दिल्ली कोर्ट ने CBI को दी दो दिन की ट्रांजिट रिमांड
भारत लाए जाने के बाद सोमवार को सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने सीबीआई को उसकी दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दे दी। अब सीबीआई उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश करेगी। सौरभ के खिलाफ सीबीआई के दो मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय कथित मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच कर रहा है।
कई जांच एजेंसियों के रडार पर महादेव नेटवर्क
महादेव ऑनलाइन सट्टा एप से जुड़े कथित अवैध कारोबार की जांच में ईडी, सीबीआई, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और पुलिस जुटी हुई हैं। जांच का दायरा कथित सट्टा कारोबार, अवैध कमाई, मनी लॉन्ड्रिंग और इससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क तक फैला हुआ है। अब सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को इस पूरे नेटवर्क से जुड़े नए तथ्य मिलने की उम्मीद है। वहीं, कथित साझेदारों के बीच बढ़ती दूरी और संपत्तियों को लेकर विवाद की चर्चाओं ने मामले को और दिलचस्प बना दिया है।
