Vedanta Power Plant Accident: सक्ती प्लांट हादसे में मौतों का आंकड़ा 25 पहुंचा, एक और मजदूर की मौत
Vedanta Power Plant Accident में मौतों का आंकड़ा 25 पहुंचा। सक्ती प्लांट हादसे में झुलसे मजदूर की इलाज के दौरान मौत, मामले में 19 लोगों पर FIR, जांच जारी।
Vedanta Power Plant Accident ने छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 14 अप्रैल को हुए भीषण बायलर विस्फोट हादसे में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब इस हादसे में एक और मजदूर की मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 25 हो गया है।
Vedanta Power Plant Accident के तहत सामने आई जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के रहने वाले मजदूर विश्वजीत साहू, जो इस हादसे में गंभीर रूप से झुलस गए थे, ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी मौत से पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
इलाज के दौरान हुई मौत
Vedanta Power Plant Accident में घायल हुए विश्वजीत साहू का इलाज रायपुर के Shri Shankara Hospital में चल रहा था। उन्हें अंडर ऑब्जर्वेशन में रखा गया था, लेकिन इलाज के दौरान अचानक उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी मौत हो गई।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि हादसे में झुलसे मजदूरों की हालत कितनी गंभीर थी।
कैसे हुआ हादसा
Vedanta Power Plant Accident की जांच में सामने आया है कि 14 अप्रैल को प्लांट के बायलर फर्नेस में अत्यधिक मात्रा में ईंधन जमा हो गया था। इसके कारण बायलर के अंदर दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया।
दबाव बढ़ने के चलते बायलर का निचला पाइप अपनी जगह से हट गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए थे।
घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज
Vedanta Power Plant Accident के बाद घायलों को तत्काल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। कई मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई थी, जिनका इलाज लगातार जारी था।
डॉक्टरों के मुताबिक, कई मरीज 50 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे, जिससे उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी।
19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज
Vedanta Power Plant Accident में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए Anil Agarwal समेत 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
इसके अलावा प्लांट हेड देवेंद्र पटेल और अन्य अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
उच्च स्तरीय जांच शुरू
Vedanta Power Plant Accident की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। बिलासपुर संभाग के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इस जांच का उद्देश्य हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना और दोषियों की जिम्मेदारी तय करना है।
लोगों से मांगे जा रहे साक्ष्य
Vedanta Power Plant Accident की जांच को पारदर्शी बनाने के लिए आम जनता, प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों से साक्ष्य और दस्तावेज आमंत्रित किए गए हैं।
जो भी व्यक्ति इस हादसे से जुड़ी जानकारी साझा करना चाहता है, वह 29 अप्रैल को आयुक्त कार्यालय, बिलासपुर में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकता है।
आयुक्त का बयान
बिलासपुर संभाग आयुक्त Sunil Jain ने कहा कि इस जांच का उद्देश्य न केवल दुर्घटना के कारणों का पता लगाना है, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के उपाय भी सुनिश्चित करना है।
उन्होंने लोगों से जांच में सहयोग करने की अपील की है।
औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल
Vedanta Power Plant Accident के बाद औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं।
इस हादसे ने यह भी दिखाया है कि बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कितना जरूरी है।
परिजनों में आक्रोश
Vedanta Power Plant Accident में मृतकों के परिजनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो इतनी बड़ी संख्या में जानें नहीं जातीं।
परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है।
Vedanta Power Plant Accident छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक बनता जा रहा है। लगातार बढ़ती मौतों की संख्या ने प्रशासन और उद्योग प्रबंधन दोनों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। साथ ही यह भी जरूरी है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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