मशीनें थक गईं, पर हिली नहीं प्रतिमा! उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में उमड़े भक्त, गूंज रहे सुंदरकांड और चालीसा के पाठ

उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में आगामी ‘सिंहस्थ 2028’ की तैयारियों के बीच एक अभूतपूर्व धार्मिक घटनाक्रम ने समूचे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शहर के प्रसिद्ध ‘खड़े हनुमान मंदिर’ की ख्याति अब केवल मालवा अंचल तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए देश के कोने-कोने में पहुंच चुकी है। करीब 10 दिन पहले शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब एक बड़े जनांदोलन और आस्था के महाकुंभ में तब्दील हो चुका है। इंटरनेट पर वायरल हो रहे वीडियो और रील्स को देखकर प्रतिदिन हजारों की तादाद में रामभक्त और श्रद्धालु दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं।

क्या है पूरा मामला: चौड़ीकरण में हटाना था मंदिर, प्रतिमा नहीं हिली

दरअसल, सिंहस्थ 2028 के भव्य आयोजन को लेकर उज्जैन जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा शहर के प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण का कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है। इसी विकास कार्य की जद में आ रहे धार्मिक स्थलों और ढांचों को अन्यत्र विस्थापित या हटाने की कार्रवाई चल रही थी।

इसी क्रम में करीब 10 दिन पूर्व प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम भारी मशीनों के साथ खड़े हनुमान मंदिर को हटाने पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान मंदिर का बाहरी ढांचा और शेड तो हटा दिया गया, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, मशीनों के पूरे जोर लगाने के बावजूद भगवान हनुमान जी की प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई। तकनीकी रूप से भले ही इसके अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हों, लेकिन श्रद्धालुओं और हिंदूवादी संगठनों ने इसे सीधे तौर पर बजरंगबली का साक्षात चमत्कार मान लिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई रील्स, देश भर से पहुंचने लगे श्रद्धालु

इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जंगल की आग की तरह फैल गया। रील्स वायरल होते ही स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न राज्यों से भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। मंदिर परिसर में अब चौबीसों घंटे भक्तों का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है।

गदा वितरण, अखंड सुंदरकांड और बटुकों के मंत्रोच्चार

मंदिर स्थल पर वर्तमान में उत्सव जैसा माहौल बन चुका है:

भक्तिमय अनुष्ठान: विभिन्न हिंदू संगठनों और भक्त मंडलों द्वारा लगातार सुंदरकांड और अखंड हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा है।

बटुकों का दल: हाल ही में वेदपाठी बटुकों के एक बड़े दल ने मंदिर पहुंचकर वैदिक ऋचाओं, धार्मिक श्लोकों और हनुमान अष्टक का सस्वर पाठ कर माहौल को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया।

सेवा और प्रसाद: भक्तों द्वारा आने वाले दर्शनार्थियों को निःशुल्क प्रसाद, जल और महाबली हनुमान जी का प्रतीक मानी जाने वाली ‘गदा’ का वितरण किया जा रहा है।

विस्थापन के विरोध में लामबंद हुए संत और संगठन: ‘यहीं रहेगा मंदिर’

प्रतिमा के न हटने के बाद अब मंदिर को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करने का चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। साधु-संतों, हिंदूवादी संगठनों और आम नागरिकों का कहना है कि जब स्वयं पवनपुत्र हनुमान ने अपने स्थान पर अडिग रहकर संकेत दे दिया है, तो प्रशासन को अपनी योजना में संशोधन करना चाहिए। भक्तों की दो टूक मांग है कि सड़क के नक्शे में आंशिक बदलाव कर मंदिर को उसी मूल स्थान पर यथावत रहने दिया जाए। जनभावनाओं के भारी दबाव को देखते हुए अब प्रशासन के आला अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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