रायपुर धान खरीदी घोटाला: 104 बोरी को दिखाया 850, समिति प्रभारी ने सरकार को लगाया 7 लाख का चूना

रायपुर धान खरीदी घोटाला

रायपुर धान खरीदी घोटाला

रायपुर जिले के उरला थाना क्षेत्र अंतर्गत कुम्हारी स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में धान खरीदी के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। समिति प्रभारी पर 850 बोरी धान की फर्जी एंट्री कर शासन और समिति को 7 लाख 6 हजार 909 रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उरला थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

समिति में ऐसे होती है धान खरीदी प्रक्रिया

प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित कुम्हारी (पंजीयन क्रमांक 1383) में ग्राम कुम्हारी, चिखली, पठारीडीह और कन्हेरा के किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जाती है। धान खरीदी के दौरान बोरी गिनती, पावती बनाना और रजिस्टर में एंट्री की जिम्मेदारी समिति प्रभारी कृष्णा साहू के पास थी, जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा आनलाइन एंट्री कर किसानों के खातों में भुगतान किया जाता था।

नोडल अधिकारी की सूचना से खुला मामला

20 जनवरी 2026 को कंप्यूटर ऑपरेटर और शासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी श्रृंखला शर्मा (ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी) ने लिखित सूचना दी कि समिति में धान खरीदी के दौरान 746 बोरी धान की हेराफेरी की गई है।
इसके बाद 30 जनवरी 2026 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक धरसींवा के प्रबंधक और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में समिति के दस्तावेजों की गहन जांच की गई।

दस्तावेजों के मिलान में उजागर हुई गंभीर अनियमितता

जांच के दौरान धान खरीदी पंजी, कैश बुक, हमाली पंजी, टोकन पर्ची और तौल पत्रक का आपस में मिलान किया गया। इस प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिससे बड़े स्तर पर हेराफेरी की पुष्टि हुई।

104 बोरी की जगह 850 बोरी दर्ज कर दिया भुगतान

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि किसान आलोक शर्मा केवल 104 बोरी धान (28 बोरी मोटा धान और 76 बोरी सरना धान) लेकर समिति पहुंचा था। लेकिन समिति प्रभारी ने तौल पत्रक और रिकॉर्ड में 850 बोरी धान की फर्जी एंट्री कर दी। इसी आधार पर किसान के खाते में ₹7,06,909.60 की राशि का आनलाइन भुगतान कर दिया गया।

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किसान और कर्मचारियों के बयान से पुष्टि

किसान आलोक शर्मा ने अपने लिखित बयान में स्पष्ट किया कि उसने सिर्फ 104 बोरी धान ही बेचा था। उसने यह भी कहा कि यदि उसके खाते में अतिरिक्त राशि आई है, तो वह उसे लौटाने के लिए तैयार है। वहीं समिति में कार्यरत कर्मचारियों और हमालों के बयान भी इस हेराफेरी की पुष्टि करते हैं।

समिति प्रभारी ने स्वीकार की गलती

पूछताछ के दौरान आरोपी समिति प्रभारी कृष्णा साहू ने स्वीकार किया कि उससे गलतीवश 104 बोरी की जगह 850 बोरी की पावती दर्ज हो गई थी। हालांकि पुलिस इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

उरला थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 337, 338, 339 और 340 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। मामले की जांच उप निरीक्षक रामनाथ चंद्रवंशी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि धान खरीदी से जुड़े अन्य कर्मचारियों और बैंक लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

 

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