25 साल बाद सामने आया पेंशन विवाद, छत्तीसगढ़ ने एमपी से मांगे 10 हजार करोड़
पेंशन विवाद
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के गठन को 25 वर्ष पूरे होने के बाद अब बंटवारे से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय असर सामने आया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्षों से चल रही पेंशन वितरण व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ी पकड़ते हुए मध्यप्रदेश से करीब 10 हजार करोड़ रुपये की मांग की है। जांच में यह सामने आया है कि पेंशन भुगतान में तय हिस्सेदारी के अनुसार मध्यप्रदेश का योगदान वर्षों तक पूरा नहीं दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश सरकार इस राशि के भुगतान को लेकर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गई है, हालांकि कोशिश यह की जा रही है कि पूरी रकम एकमुश्त न देकर दो से तीन वर्षों की किस्तों में दी जाए। संभावना जताई जा रही है कि पहली किस्त का प्रावधान फरवरी में पेश होने वाले मध्यप्रदेश के बजट में किया जा सकता है। पहले से ही घाटे की ओर बढ़ रही राज्य की वित्तीय स्थिति पर इस अतिरिक्त बोझ का असर और बढ़ सकता है।
बंटवारे की शर्तों में चूक
वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बंटवारे के समय यह स्पष्ट शर्त तय की गई थी कि छत्तीसगढ़ पर आने वाले किसी भी वित्तीय दायित्व में 26.63 प्रतिशत राशि छत्तीसगढ़ वहन करेगा, जबकि शेष 73.37 प्रतिशत खर्च मध्यप्रदेश को उठाना होगा। यही व्यवस्था पेंशन भुगतान पर भी लागू थी। हालांकि, पेंशन वितरण के दौरान इस अनुपात का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और मध्यप्रदेश का हिस्सा नियमित रूप से नहीं दिया गया।
ऐसे सामने आई गड़बड़ी
बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में बढ़ते खर्चों के दबाव के चलते वित्त विभाग ने पेंशन भुगतान से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की। इस दौरान पता चला कि वर्षों से मध्यप्रदेश का निर्धारित हिस्सा प्राप्त नहीं हो रहा है।
बैंकों के माध्यम से पेंशन का वितरण होता रहा और आरबीआई के जरिए अकाउंटेंट जनरल की रिपोर्ट के आधार पर राशि ट्रांसफर की जाती रही, लेकिन हिस्सेदारी की गणना में त्रुटि बनी रही।
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर करीब 10 वर्षों की देनदारी का आकलन किया गया और दिसंबर 2025 में मध्यप्रदेश सरकार को इसकी औपचारिक मांग भेजी गई। मध्यप्रदेश के वित्त विभाग ने जांच के बाद इस मांग को सही पाया है। अब यह तय करने पर मंथन चल रहा है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान किस तरीके से किया जाए।
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10 दिन में हो सकती है अहम बैठक
शुरुआत में छत्तीसगढ़ में पेंशनधारकों की संख्या एक लाख से कम थी, जो अब बढ़कर लगभग डेढ़ लाख हो गई है। इससे भविष्य में भी मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ को नियमित भुगतान का दबाव बना रहेगा। सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर आने वाले 10 दिनों के भीतर दोनों राज्यों के बीच एक अहम बैठक हो सकती है।
डीआर बढ़ोतरी से बढ़ी मुश्किल
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में पेंशनधारकों की महंगाई राहत (डीआर) 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दी है और इसकी सूचना सहमति के लिए मध्यप्रदेश को भेजी है। यदि मध्यप्रदेश इस पर सहमति देता है तो उसे अपने राज्य के पेंशनर्स की डीआर में भी 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी होगी, जिससे वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।
