नक्सल संगठन में बड़ा फेरबदल: बसवराज की मौत के बाद तिरुपति उर्फ देवजी बने नए मुख्य सचिव, हिडमा को भी नई जिम्मेदारी

बस्तर – बस्तर में नक्सल संगठन के भीतर बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। 21 मई को नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के जंगलों में हुई मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी नेता और महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज के मारे जाने के बाद संगठन ने तेलंगाना के करीमनगर निवासी दलित नेता तिरुपति उर्फ देवजी को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। साथ ही, कुख्यात माओवादी कमांडर हिडमा उर्फ संतोष को विशेष आंचलिक समिति सचिव (Zonal Secretary) की जिम्मेदारी दी गई है।

हिडमा पर कई बड़े हमलों का आरोप

हिडमा, जो पीएलजीए (People’s Liberation Guerrilla Army) की पहली बटालियन का कमांडर रह चुका है, अब संगठन की रणनीतिक जिम्मेदारियों में शामिल हो गया है। हिडमा को वर्ष 2010 के दंतेवाड़ा हमले और 2019 में भाजपा विधायक भीमा मंडवी की हत्या का मास्टरमाइंड माना जाता है। उस पर ₹40 लाख का इनाम घोषित है और वह सुरक्षा एजेंसियों की टॉप वांटेड लिस्ट में शामिल है।

रेड कॉरिडोर में माओवादी नेटवर्क कमजोर पड़ा

बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए सघन नक्सल विरोधी अभियानों ने देश के माओवादी बेल्ट, जिसे ‘रेड कॉरिडोर’ कहा जाता है, को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। कई सीनियर माओवादी या तो मारे गए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। अब संगठन नए चेहरों को सामने लाकर बस्तर में दोबारा पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।

नारायणपुर मुठभेड़: मारे गए शीर्ष माओवादी नेता

पिछले महीने नारायणपुर के जंगलों में हुई बड़ी मुठभेड़ में माओवादी महासचिव बसवराज के साथ 28 अन्य माओवादी मारे गए थे।
बसवराज के खिलाफ कुल ₹11.73 करोड़ का इनाम घोषित था। इसके अलावा, अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में ₹10 करोड़ का अलग इनाम भी रखा गया था।

बसवराज की सुरक्षा टीम पूरी तरह खत्म

मुठभेड़ में बसवराज की सुरक्षा में तैनात माओवादियों की “कंपनी नंबर-7” को भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया। यह यूनिट माओवादी संगठन की सबसे ताकतवर सुरक्षा टुकड़ी मानी जाती थी और तीन दशकों में यह पहली बार है जब किसी Politburo सदस्य को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में ढेर किया है।

 

Youthwings