UCC Explained: छत्तीसगढ़ में लागू होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड, शादी-तलाक से विरासत तक बदल जाएंगे ये नियम
UCC Explained: अब सभी धर्मों के लिए एक ही कानून! छत्तीसगढ़ में UCC से बदल जाएगी शादी और संपत्ति की तस्वीर
UCC Explained: शादी, तलाक, संपत्ति और गोद लेने के नियम अब धर्म के हिसाब से नहीं, एक कानून से तय होंगे! छत्तीसगढ़ में UCC लागू होने जा रहा है, जानिए आपकी जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ेगा।
छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। जानिए UCC क्या है, इससे शादी, तलाक, संपत्ति, गोद लेने और दूसरी शादी के नियमों में क्या बदलाव होंगे।
Uniform Civil Code in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति UCC लागू करने के स्वरूप, नियम और सुझावों पर रिपोर्ट तैयार करेगी। मुख्यमंत्री समिति के अन्य सदस्यों का चयन करेंगे।
सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेशभर में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर UCC क्या है, यह कैसे लागू होगा और आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलाव लाएगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं
UCC Explained: क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है, सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून, चाहे उनका धर्म, जाति या समुदाय कोई भी हो।
इस कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, भरण-पोषण और पारिवारिक विवादों में सभी पर एक जैसा कानून लागू होगा।
अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग Personal Laws लागू हैं। जैसे-
- हिंदुओं के लिए हिंदू मैरिज एक्ट
- मुस्लिम समुदाय के लिए शरीयत आधारित नियम
- ईसाई और पारसी समुदाय के लिए अलग कानून
UCC लागू होने के बाद इन सभी मामलों में एक समान कानून लागू होगा।
UCC Explained: संविधान में क्या है प्रावधान?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को निर्देश दिया गया है कि वह नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करे।
हालांकि यह अभी तक पूरे देश में लागू नहीं हो सका है, लेकिन कुछ राज्यों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है।
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UCC Explained: छत्तीसगढ़ में क्यों लागू करना चाहती है सरकार?
सरकार का कहना है कि अलग-अलग पर्सनल लॉ होने से-
- न्याय प्रक्रिया जटिल होती है
- समानता का सिद्धांत प्रभावित होता है
- महिलाओं के अधिकारों में असमानता बनी रहती है
- कई मामलों में कानूनी विवाद बढ़ जाते हैं
UCC लागू होने से कानून सरल, पारदर्शी और समान होगा।
UCC Explained: UCC लागू होने पर क्या बदल जाएगा?
1. शादी के लिए एक समान नियम
सभी धर्मों के लिए विवाह की एक समान कानूनी प्रक्रिया होगी।
2. बिना तलाक दूसरी शादी नहीं
कोई भी व्यक्ति बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी नहीं कर सकेगा।
3. तलाक के नियम समान
हर धर्म के लिए तलाक की प्रक्रिया एक जैसी होगी।
4. गोद लेने के कानून एक होंगे
दत्तक ग्रहण के लिए अलग-अलग धार्मिक नियम समाप्त हो जाएंगे।
5. संपत्ति बंटवारा एक नियम से
उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारा समान कानून के तहत होगा।
UCC Explained: क्या नहीं बदलेगा?
सरकार और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार UCC का असर केवल सिविल मामलों पर होगा। इसका धार्मिक परंपराओं पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इन चीजों पर असर नहीं होगा
- पूजा-पाठ / इबादत की पद्धति
- धार्मिक अनुष्ठान
- खान-पान
- वेश-भूषा
- शादी कराने वाले पंडित/मौलवी/पादरी
- यानी आपकी धार्मिक पहचान और मान्यताएं बरकरार रहेंगी।

Uniform Civil Code in Chhattisgarh: सरकार का तर्क क्या है?
सरकार का कहना है कि UCC लागू करने का उद्देश्य
- धार्मिक समानता बढ़ाना
- लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना
- महिलाओं के अधिकार मजबूत करना
- कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाना
Uniform Civil Code in Chhattisgarh: राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज
UCC को लेकर देशभर में बहस भी जारी है। समर्थकों का कहना है कि यह समानता की दिशा में बड़ा कदम है, जबकि विरोध करने वाले इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।
Uniform Civil Code in Chhattisgarh: अब आगे क्या होगा?
रंजना देसाई समिति सभी पक्षों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद सरकार ड्राफ्ट कानून लाकर विधानसभा में इसे पेश कर सकती है।
अगर यह लागू होता है तो छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल होगा जहां UCC लागू करने की ठोस पहल हुई है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना में बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। शादी, तलाक, संपत्ति और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े नियम एक जैसे होने से आम नागरिकों के जीवन पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि समिति क्या सुझाव देती है और सरकार इसे किस स्वरूप में लागू करती है।
