‘लौटते ही फांसी पर लटकाएंगे’! पूर्व प्रधानमंत्री की वापसी से पहले मचा बवाल… दी खुली धमकी

2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे ने चेताया.. अगर तारीक रहमान भी समझौता कर लाएं तो सड़कें खाली नहीं होंगी, भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ लड़ाई अधूरी

 

ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के दिसंबर तक देश लौटने के साफ ऐलान ने देश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। इस ऐलान के कुछ हफ्तों बाद नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के संयोजक और संसद में विपक्ष के मुख्य व्हिप नाहिद इस्लाम ने ऐसा बयान दिया है जिसने सियासी गलियारों में तूफान ला दिया। उन्होंने कहा कि अगर शेख हसीना दिसंबर में देश लौटती हैं तो उन्हें एयरपोर्ट से सीधे फांसी के तख्ते पर ले जाया जाएगा। कोई बातचीत नहीं होगी, कोई समझौता नहीं चलेगा।

 

नाहिद इस्लाम ने यह बात 3 अगस्त 2026 को ढाका के काकराईल स्थित इंस्टीट्यूशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स बांग्लादेश (IDEB) के मुक्तियोद्धा स्मृति सभागार में ‘शहीद परिवार और घायलों की आवाज में जनता का एक दफा’ नामक चर्चा सभा में कही। उन्होंने जुलाई 2024 के आंदोलन के शहीदों के परिवारों और घायल योद्धाओं को संबोधित करते हुए पूछा, “अगर शेख हसीना दिसंबर में आती हैं और प्रधानमंत्री तारीक रहमान उनकी वापसी का इंतजाम करते हैं, तो क्या आप लोग तैयार हैं? हम सब तैयार हैं। एयरपोर्ट से सीधे फांसी के मंच पर। कोई बात नहीं होगी। पूरा बांग्लादेश उस दिन सड़कों पर होगा, ढाका की सड़कों पर होगा। उन्हें सीधे फांसी के तख्ते तक ले जाया जाएगा। फांसी लागू होने तक हम सड़क नहीं छोड़ेंगे।”

 

यह बयान सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि 2024 के उस छात्र-जन आंदोलन की याद दिलाता है जिसने 15 साल से सत्ता में बैठी शेख हसीना की सरकार को गिरा दिया था। नाहिद इस्लाम उस आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे। उन्होंने ही 3 अगस्त 2024 को केंद्रीय शहीद मीनार से एक दफे की मांग शेख हसीना का इस्तीफा की घोषणा की थी। अगले ही दिन हसीना हेलीकॉप्टर से भारत भाग गईं।

 

शेख हसीना ने जुलाई 2026 में रॉयटर्स को दिए साक्षात्कार में पहली बार साफ टाइमलाइन दी थी। उन्होंने कहा था कि वे और आवामी लीग के वरिष्ठ नेता दिसंबर के आसपास स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटेंगे और अदालत में सरेंडर करेंगे। 78 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, यहां तक कि मार भी सकते हैं। फिर भी मुझे जाना ही होगा। अगर मौत आती है तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी मिट्टी पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।” उन्होंने मौत की सजा को “फर्जी और राजनीतिक बदले की प्रक्रिया” करार दिया था। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में जुलाई 2024 के प्रदर्शनों के दौरान हुए क्रैकडाउन के लिए उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार उस समय सुरक्षा बलों की कार्रवाई में करीब 1400 लोग मारे गए थे।

 

नाहिद इस्लाम का बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है। वे कहते हैं कि 2024 का आंदोलन किसी व्यक्ति को सत्ता में लाने के लिए नहीं, बल्कि तानाशाही, भ्रष्टाचार और रंगदारी की राजनीति खत्म करने के लिए था। अगर किसी राजनीतिक समझौते के तहत हसीना लौटती हैं, तब भी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने वर्तमान BNP नेतृत्व वाली सरकार (प्रधानमंत्री तारीक रहमान) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बावजूद भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, बिजली और गैस संकट जैसी समस्याओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ। आम लोगों की उम्मीदों के मुताबिक बदलाव नहीं हो पाया।

 

नाहिद इस्लाम 2024 के आंदोलन के बाद अंतरिम सरकार में सलाहकार भी बने थे। फरवरी 2025 में उन्होंने इस्तीफा देकर नेशनल सिटिजन पार्टी की स्थापना की, जो छात्र आंदोलन से निकली पहली बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाती है। अब वे संसद में विपक्ष के मुख्य व्हिप हैं। उनका यह रुख दर्शाता है कि जुलाई योद्धा अभी भी हसीना और आवामी लीग के किसी भी तरह के पुनर्वास के खिलाफ हैं। आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है और पार्टी को आतंकवादी संगठन करार देने की मांग भी उठती रही है।

 

राजनीतिक विश्लेषक इस बयान को बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता संरचना की जटिलता का संकेत मान रहे हैं। एक तरफ शेख हसीना भारत में निर्वासन में रहकर अपनी पार्टी को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही हैं। दूसरी तरफ BNP सरकार सत्ता संभाले हुए है, लेकिन छात्र आंदोलन से निकली नई ताकतें (NCP जैसे दल) पुरानी पार्टियों पर भरोसा नहीं करतीं। नाहिद इस्लाम पहले भी कई बार कह चुके हैं कि हसीना सिर्फ फांसी की सजा लागू कराने के लिए लौटें। जुलाई में भी उन्होंने कहा था कि देश पहले ही 16 साल के विनाश का शिकार हो चुका है, अब फांसी लागू होनी चाहिए।

 

यह विवाद सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि भावनात्मक और ऐतिहासिक भी है। 2024 का आंदोलन सिर्फ कोटा सिस्टम के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन जल्दी ही भ्रष्टाचार, निरंकुशता और मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ व्यापक जन-उभार बन गया। हसीना सरकार के दौरान कई विपक्षी नेताओं पर मुकदमे, मीडिया पर दबाव और चुनावों पर सवाल उठते रहे। अब जब हसीना वापसी की बात कर रही हैं तो शहीदों के परिवार और घायल युवा इसे पुरानी व्यवस्था की वापसी के रूप में देख रहे हैं।

 

बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने कहा है कि अगर हसीना लौटती हैं तो कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन नाहिद इस्लाम जैसे नेताओं का रुख साफ है कोई राजनीतिक समझौता स्वीकार्य नहीं। वे चेतावनी देते हैं कि अगर सरकार समझौता करती है तो जुलाई योद्धा फिर सड़कों पर उतरेंगे।

 

दिसंबर नजदीक आ रहा है। शेख हसीना की वापसी अगर होती है तो यह बांग्लादेश की राजनीति का नया अध्याय लिखेगी या तो कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रायल, या फिर सड़कों पर नया टकराव। नाहिद इस्लाम का बयान याद दिलाता है कि 2024 का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ। वह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता था, वह व्यवस्था परिवर्तन चाहता था। और उस मांग को पूरा करने के लिए युवा नेता अभी भी तैयार खड़े हैं… एयरपोर्ट से फांसी के तख्ते तक।

 

देश की जनता अब देख रही है कि क्या दिसंबर में कोई ऐतिहासिक सरेंडर होगा, या फिर नया राजनीतिक तूफान। बांग्लादेश की सड़कें एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार दिख रही हैं।

 

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