20 चिताओं पर बवाल: मंत्री का मुआवजे का वादा, दिग्विजय ने SP को ललकारा; उमा के तीखे तेवर
सागर/भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले का बंडा क्षेत्र इस वक्त मातम और चीखों के साए में है। यहां कथित जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है। इस वीभत्स त्रासदी की पुष्टि खुद मध्य प्रदेश सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने की है। 20 चिताओं के जलने के बाद जहां सरकार प्रशासनिक स्तर पर लीपापोती और राहत के दावों में जुटी है, वहीं इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सागर एसपी पर 50-60 लाख रुपये महीने की वसूली के संगीन आरोप लगाए हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार के मंत्रियों और विधायकों की जवाबदेही तय करने की मांग कर दी है।
मंत्री गोविंद राजपूत पहुंचे बीएमसी अस्पताल: 3 दिन में मुआवजे का वादा
मौतों का आंकड़ा 20 पहुंचते ही मंत्री गोविंद सिंह राजपूत बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती बीमार मरीजों का हाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए।
अस्पताल में मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री राजपूत ने घोषणा की जहरीली शराब से जान गंवाने वाले सभी मृतकों के परिजनों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाएगी और यह राशि तीन दिन के भीतर सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
मंत्री राजपूत ने कहा कि अवैध शराब के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
विपक्ष पर बरसे मंत्री: ‘दिग्विजय बिना शहद का छत्ता, पटवारी में बचपना’
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने तीखे सियासी तीर चलाए। उन्होंने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष होने के बावजूद वे बचकानी बयानबाजी कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को आड़े हाथों लेते हुए मंत्री ने कहा कि दिग्विजय सिंह को अब उनकी अपनी पार्टी भी सीरियसली नहीं लेती। वे उस छत्ते की तरह हैं जिसमें से शहद निकल चुका है। इस उम्र में उन्हें भगवान का भजन करना चाहिए, लेकिन वे दिन-रात सिर्फ सोशल मीडिया पर ट्वीट करने में व्यस्त रहते हैं।
दिग्विजय सिंह का SP पर सनसनीखेज आरोप
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर संगठित शराब माफिया को संरक्षण देने के बेहद गंभीर आरोप लगाए।
दिग्विजय सिंह ने सीधे तौर पर सागर एसपी अनुराग सुजानिया पर हर महीने 50 से 60 लाख रुपये अवैध शराब माफिया से वसूलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसपी मुझ पर मानहानि का केस करें, मैं कोर्ट में सबूत पेश कर सिद्ध कर दूंगा कि वे पैसे लेते हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सागर एसपी को तत्काल हटाने और उनकी अकूत संपत्ति की जांच EOW से कराने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि सागर कलेक्टर उनका फोन तक नहीं उठाती हैं, जिसकी शिकायत वे मुख्य सचिव से करेंगे।
4 परिवारों को लिया गोद
दिग्विजय सिंह ने प्रभावित गांव के चार अनाथ परिवारों को गोद लेने, उन्हें प्रतिमाह 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनके बच्चों की संपूर्ण शिक्षा का खर्च उठाने का ऐलान किया। साथ ही ‘सागर गोल्ड’ ब्रांड शराब के मालिक पर हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
उमा भारती के तीखे तेवर: ‘विधायक और मंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए’
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सियासी ट्विस्ट तब आया जब भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर प्रशासनिक और राजनीतिक गठजोड़ पर तीखा हमला बोला।
सीएम से मुलाकात के बाद उमा भारती ने दो-टूक कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब बिक रही थी और लोगों की जान जा रही थी, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों यानि सरपंच से लेकर विधायक और मंत्री तक को इसकी भनक कैसे नहीं लगी? इन सभी की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मंत्री के साथ शराब कांड के आरोपी की वायरल तस्वीरों की ओर इशारा करते हुए उमा भारती ने कहा कि जो भी जनप्रतिनिधि या अफसर आरोपियों के संपर्क में रहे हैं, उनके खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उमा खुद जाएंगी बंडा
उमा भारती ने ऐलान किया कि वे जल्द सागर के बंडा पहुंचेंगी और पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से मध्य प्रदेश में शराबबंदी की दिशा में ठोस कदम उठाने और सख्त आबकारी नीति लागू करने की अपील की।
प्रशासनिक नाकामी पर उठते सवाल
20 जिंदगियों के खत्म होने के बाद अब सवाल केवल मुआवजे का नहीं है। सवाल यह है कि रिहायशी इलाकों और गांवों में जहरीली और अवैध शराब की खेप किसकी सरपरस्ती में खप रही थी? क्या पुलिस और आबकारी विभाग को वाकई इस समानांतर सिंडिकेट की जानकारी नहीं थी? क्या जांच केवल छोटे गुर्गों और शराब बेचने वालों तक सीमित रहेगी या फिर सिंडिकेट के सरगनाओं और सफेदपोश संरक्षकों पर भी शिकंजा कसेगा?
