क्या निजी हाथों में जा रहा है इसरो? निजीकरण की आशंकाओं पर चेयरमैन वी. नारायणन ने तोड़ी चुप्पी, कर्मचारियों को दिया संदेश

बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच संगठन के प्रमुख वी. नारायणन ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा भेजी गई चिंताओं भरी चिट्ठियों का जवाब देते हुए चेयरमैन ने भरोसा दिलाया कि किसी भी कर्मचारी को अपनी नौकरी, करियर या भविष्य को लेकर आशंकित होने की रत्ती भर जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी का उद्देश्य संगठन को बेचना नहीं, बल्कि देश की समग्र अंतरिक्ष क्षमताओं का विस्तार करना है। सभी संवेदनशील, रणनीतिक और गहरे अंतरिक्ष से जुड़े मिशन हमेशा इसरो के नियंत्रण में ही रहेंगे।

“64 साल पुराना प्रोग्राम, आम जनता के लिए 56 स्पेस एसेट्स सक्रिय”

इसरो चेयरमैन ने देश के अंतरिक्ष सफर का ब्योरा देते हुए कहा, “हमारा स्पेस प्रोग्राम 64 साल पुराना गौरवशाली इतिहास रखता है। वर्तमान में अंतरिक्ष में हमारे 56 स्पेस एसेट्स सक्रिय रूप से देश की सेवा कर रहे हैं और आम लोगों के जीवन को बेहतर बना रहे हैं। हालांकि, जिस तेजी से देश का दायरा बढ़ रहा है, हमें इससे कहीं अधिक संख्या में उपग्रहों और संपत्तियों की आवश्यकता है।”

उन्होंने रेखांकित किया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों की शुरुआत 6 वर्ष पूर्व की गई थी। इन सुधारों का प्राथमिक लक्ष्य देश में एक मजबूत स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना और नवाचार से जुड़े प्राइवेट स्टार्टअप्स को तकनीकी सहारा देना है, न कि इसरो की मुख्य भूमिका को सीमित करना।

“80% बजट उद्योगों में ही लगता है, 450 कंपनियां पहले से भागीदार”

निजीकरण के भ्रम को दूर करते हुए वी. नारायणन ने बताया कि अंतरिक्ष मिशनों में भारतीय उद्योगों की भागीदारी कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा, “जब भी कोई PSLV या GSLV रॉकेट लॉन्च होता है, तो यह न समझें कि उसका हर एक कल-पुर्जा इसरो के भीतर ही बना है। बजट का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही भारतीय उद्योगों में निवेश किया जाता है। मौजूदा समय में 450 से अधिक निजी और सार्वजनिक उद्योग हमारे साथ सीधे काम कर रहे हैं।”

सालाना 50 लॉन्च व्हीकल्स की मांग, चिंताओं को दूर करने की जिम्मेदारी

चेयरमैन ने कर्मचारियों के संशयों को स्वाभाविक बताते हुए कहा, “मेरे साथियों के मन में जो भी शंकाएं हैं, वे जायज हैं और उन्हें बैठकर दूर करना हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने आगे की चुनौती का खाका खींचते हुए बताया कि आने वाले वर्षों में भारत को अपनी रणनीतिक, वैज्ञानिक और संचार जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल करीब 50 लॉन्च व्हीकल्स (रॉकेटों) की आवश्यकता होगी। इतनी भारी मांग को केवल अकेले सरकारी ढांचे के दम पर पूरा करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए घरेलू निजी क्षेत्र को साथ जोड़कर आगे बढ़ना

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