Donald Trump Tariff On Drugs: अमेरिका ने जेनेरिक दवाओं पर लगाया 200% टैरिफ, भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़ा झटका

ट्रंप ने कहा- दो साल तक शून्य टैरिफ, फिर 100% और 200% कर दिया जाएगा.. भारत से अमेरिका जाने वाली 40% जेनेरिक दवाएं प्रभावित होंगी

Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बम फोड़ा है। डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी जेनेरिक दवाओं पर आक्रामक टैरिफ नीति का ऐलान किया है। इस योजना के तहत शुरुआती दो वर्षों तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद जेनेरिक दवा पर 100 फीसदी और फिर 200% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप के इस फैसले से ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहे जाने वाले भारत पर भयंकर प्रभाव पड़ेगा। भारत बड़े पैमाने पर अमेरिका को जेनेरिक दवा एक्सपोर्ट करता है। ट्रंप के इस ऐलान के बाद भारत को भयंकर नुकसान हो सकता है। यह भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए एक गंभीर चुनौती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा कि टैरिफ का यह प्लान कई चरणों में लागू होगा। ट्रंप के मुताबिक इस कदम का मकसद अमेरिका में फार्मास्युटिकल दवाओं का प्रोडक्शन बढ़ाना है।

 ट्रंप का टैरिफ प्लान – क्या है पूरा शेड्यूल?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा कि टैरिफ का यह प्लान कई चरणों में लागू होगा और इसकी शुरुआत 1 अगस्त 2026 से होगी।

  • 1 अगस्त 2026 से 2 साल तक: सभी जेनेरिक दवाओं पर 0% टैरिफ
  • तीसरे साल (1 साल के लिए): टैरिफ बढ़ाकर 100%
  • चौथे साल से: टैरिफ बढ़ाकर 200%

ट्रंप ने कहा, “ऐसा जेनेरिक दवाइयों के प्रोडक्शन को वापस अमेरिका में लाने के लिए किया जा रहा है। जो कंपनियां तय समय-सीमा के अंदर प्लांट और इक्विपमेंट नहीं बनाएंगी, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।”

भारतीय फार्मा सेक्टर पर क्या होगा असर?

अमेरिका में खपत होने वाली लगभग 40% जेनेरिक दवाएं भारत से जाती हैं। अमेरिकी बाजार भारतीय फार्मा कंपनियों (जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला, ल्यूपिन, और अरबिंदो फार्मा) के लिए राजस्व (Revenue) का सबसे बड़ा स्रोत है।

इसमें दो साल तक 0% टैरिफ रहने के कारण भारतीय कंपनियों को तुरंत कोई वित्तीय झटका नहीं लगेगा। इस अवधि में भारत से निर्यात जारी रहेगा और कंपनियों के पास नई रणनीति बनाने का समय होगा।

 2 साल बाद क्या होगा?

2 साल बाद जब 100% और 200% का टैरिफ लागू होगा, तो भारतीय कंपनियों की दवाएं अमेरिकी बाजार में काफी महंगी हो जाएंगी। इससे उनके प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) पर भारी दबाव आएगा। यह भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती है।

 भारत का अमेरिका को एक्सपोर्ट

आईईबीएफ के आंकड़ों के अनुसार भारत नॉर्थ अमेरिका, अफ्रीका, EU, ASEAN, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन (LAC), मिडिल ईस्ट, एशिया, CIS और यूरोप के अन्य इलाकों में फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करता है।

वित्त वर्ष 2025 के दौरान, भारत ने दुनिया भर के 200 से ज़्यादा देशों में एक्सपोर्ट किया है। भारत का लगभग 50% एक्सपोर्ट नॉर्थ अमेरिका और यूरोप जैसे कड़े नियमों वाले बाज़ारों में होता है।

वित्त वर्ष 2025 में भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के लिए एक्सपोर्ट के टॉप पाँच देश USA, UK, ब्राज़ील, फ्रांस और साउथ अफ्रीका थे।

वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत से सबसे ज़्यादा इंपोर्ट करने वाले देशों में USA, UK और ब्राज़ील शामिल थे, जिनकी हिस्सेदारी क्रमशः 34.61%, 3.01% और 2.56% थी।

यह भारत के लिए अमेरिकी बाजार पर निर्भरता को कम करने की आवश्यकता को दर्शाता है। फिलहाल, भारत सरकार और फार्मा कंपनियां इस मुद्दे पर रणनीति बनाने में जुटी हैं।

 

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