धमतरी से नक्सलवाद का अंत: 47 लाख के इनामी 9 माओवादियों का सामूहिक आत्मसमर्पण
धमतरी बना नक्सल मुक्त जिला
धमतरी: जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लंबी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। माओवादी संगठन की सीतानदी एरिया कमेटी से जुड़े अंतिम बचे 9 नक्सलियों ने रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा के समक्ष हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन ने धमतरी जिले को आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त घोषित कर दिया है। यह आत्मसमर्पण राज्य में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अब तक की सबसे अहम उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
महिलाओं की बड़ी भागीदारी, 47 लाख के इनामी नक्सली सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वाले कुल 9 नक्सलियों में 7 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं, जो इस बात का संकेत है कि माओवादी संगठन के भीतर भी टूट तेजी से बढ़ रही है। इन नक्सलियों पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें से दो शीर्ष कैडर के नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपये, छह पर 5-5 लाख रुपये और एक पर 1 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। लंबे समय से ये सभी सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में शामिल थे और धमतरी व आसपास के जंगल क्षेत्रों में सक्रिय थे।
ऑटोमेटिक हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे। इनमें अत्याधुनिक ऑटोमेटिक राइफल्स शामिल थीं, जिनका इस्तेमाल माओवादी गतिविधियों में किया जा रहा था। इसके साथ ही भरमार बंदूक, दर्जनों जिंदा कारतूस, संचार उपकरण जैसे वॉकी-टॉकी, रेडियो और डिजिटल टैबलेट भी पुलिस के हवाले किए गए। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह बरामदगी नक्सली नेटवर्क के पूरी तरह कमजोर होने का स्पष्ट प्रमाण है।
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शीर्ष और तकनीकी कैडर का सरेंडर
सरेंडर करने वालों में संगठन के वरिष्ठ पदों पर रहे नक्सली भी शामिल हैं। इनमें डिविजनल कमेटी और एरिया कमेटी से जुड़े कमांडर, तकनीकी विशेषज्ञ और बॉडीगार्ड तक मौजूद हैं। इन नक्सलियों की मौजूदगी के कारण ही सीतानदी क्षेत्र लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों का गढ़ बना हुआ था। इनके आत्मसमर्पण से न केवल संगठनात्मक ढांचा टूटा है, बल्कि भविष्य में नक्सली हिंसा की संभावना भी लगभग समाप्त मानी जा रही है।
अब विकास और सामान्य पुलिसिंग पर जोर
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने इस मौके पर कहा कि धमतरी जिले में अब नक्सल गतिविधियों का कोई आधार शेष नहीं है। जिले को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद अब पुलिस का फोकस सामान्य कानून-व्यवस्था, जनसुरक्षा और विकास कार्यों पर रहेगा। उन्होंने इसे सुरक्षाबलों, प्रशासन और आत्मसमर्पण नीति की संयुक्त सफलता बताया और कहा कि आने वाले समय में प्रभावित क्षेत्रों में भरोसे और विकास की नई शुरुआत होगी।
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