सुकमा में पहली बार गरबा महोत्सव: डांडिया की थाप पर थिरके जवानों के परिवार, दुर्गा फाइटर्स ने भी जमाया रंग

सुकमा

छत्तीसगढ़ के सुकमा की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो यहां बदलते माहौल और पुलिस परिवारों के उत्साह को दर्शाती है। जिस जिले की चर्चा अक्सर नक्सलवाद और सुरक्षा अभियानों को लेकर होती रही है, वहां नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया की रौनक देखने को मिली। पुलिस लाइन में पहली बार आयोजित इस महोत्सव में जवानों के परिवार, महिला कमांडोज, बच्चे और शहीद जवानों के परिजन एक साथ उत्सव में शामिल हुए।

17 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने गरबा और डांडिया की प्रस्तुतियां दीं। पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर की पहल पर हुए इस आयोजन का उद्देश्य पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को तनावपूर्ण ड्यूटी के बीच आपसी मेलजोल और खुशियां साझा करने का अवसर देना था।

पहली बार पुलिस लाइन में हुआ गरबा-डांडिया महोत्सव

सुकमा पुलिस लाइन में पहली बार आयोजित गरबा-डांडिया महोत्सव में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान नवरात्रि के पारंपरिक रंग देखने को मिले। बच्चों से लेकर महिलाओं तक ने उत्साह के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारियां सामान्य दिनों में भी चुनौतीपूर्ण रहती हैं। ऐसे में यह आयोजन उनके लिए कामकाज से अलग समय बिताने और परिवार के सदस्यों के साथ उत्सव का आनंद लेने का अवसर बना।

दुर्गा फाइटर्स की महिला कमांडोज ने डांडिया से जीता दिल

इस महोत्सव का खास आकर्षण पुलिस की विशेष इकाई दुर्गा फाइटर्स की महिला कमांडोज रहीं। कठिन परिस्थितियों में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाली इन महिला जवानों ने जब डांडिया की छड़ियों के साथ ताल मिलाई, तो कार्यक्रम का माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया।

आमतौर पर वर्दी में सुरक्षा अभियानों और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली महिला कमांडोज का सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होना भी खास रहा। उनकी भागीदारी ने दिखाया कि कर्तव्य की व्यस्तताओं के बीच भी सांस्कृतिक परंपराओं और मनोरंजन के लिए समय निकाला जा सकता है।

शहीद जवानों के परिजनों की भागीदारी ने बनाया खास

कार्यक्रम में शहीद जवानों की माताओं, बहनों, अन्य परिजनों और बच्चों को भी आमंत्रित किया गया था। उनकी सहभागिता से महोत्सव का महत्व और बढ़ गया। यह केवल नृत्य और मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि पुलिस परिवारों को एक मंच पर लाने और उनके साथ आत्मीयता साझा करने का अवसर भी बना।

प्रतिभागियों ने पारंपरिक परिधानों में अपनी प्रस्तुतियां दीं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस पहल के जरिए शहीद जवानों के परिवारों को पुलिस समुदाय के साथ जुड़ने और उत्सव का हिस्सा बनने का अवसर मिला।

कलेक्टर और सीआरपीएफ डीआईजी ने भी परिवार के साथ लिया हिस्सा

गरबा-डांडिया महोत्सव में कलेक्टर अमित कुमार, सीआरपीएफ डीआईजी आनंद सिंह और पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर अपने परिवारों के साथ पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की।

अधिकारियों की पारिवारिक सहभागिता ने कार्यक्रम को और खास बनाया। इससे पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के साथ आपसी सहयोग और मानवीय जुड़ाव का संदेश भी सामने आया।

एसपी बोले- जवानों को मानसिक सुकून देने में मदद करते हैं ऐसे आयोजन

पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने कहा कि पुलिस की नौकरी में चुनौतियां, तनाव और जोखिम लगातार बने रहते हैं। ऐसे में सांस्कृतिक कार्यक्रम जवानों और उनके परिवारों को मानसिक सुकून देने के साथ नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। इन आयोजनों से आपसी मेलजोल बढ़ता है और पुलिस परिवारों को एक साथ समय बिताने का अवसर मिलता है।

सुकमा में पहली बार हुआ गरबा-डांडिया महोत्सव इसी सोच की एक पहल रहा। नक्सल विरोधी अभियानों और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने नवरात्रि के उत्साह को साझा करने का अवसर दिया। पुलिस लाइन में गरबा की थाप और डांडिया की खनक के बीच एक ऐसा माहौल नजर आया, जहां कर्तव्य के साथ संस्कृति, परिवार और सामाजिक सौहार्द को भी जगह मिली।

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