पेट्रोल के बाद डीजल में भी खेल! 5% बायोडीजल मिलाने की खबर, जानिए क्या है पूरा मामला?
डीजल की कीमतों और तेल कंपनियों की बढ़ती लागत के बीच अब बायोडीजल ब्लेंडिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर डीजल में 5% तक बायोडीजल मिलाया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। भारत सरकार का 2030 तक डीजल में 5% बायोडीजल मिश्रण हासिल करने का लक्ष्य है, लेकिन लक्ष्य तय होना और देशभर में इसे लागू किया जाना अलग-अलग बातें हैं।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर तेल कंपनियों की लागत पर पड़ता है। ऐसे में बायोडीजल जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की नीति को पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या डीजल में सचमुच मिलाया जा रहा है 5% बायोडीजल?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली-NCR के कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर डीजल में बायोडीजल मिलाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन स्थानों पर वास्तविक मिश्रण की मात्रा और व्यवस्था की पुष्टि के लिए तेल कंपनियों या संबंधित सरकारी विभाग का आधिकारिक बयान जरूरी है।
बायोडीजल एक वैकल्पिक ईंधन है, जिसे सोयाबीन और पाम ऑयल जैसे वनस्पति तेलों के साथ-साथ इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल जैसे स्रोतों से बनाया जा सकता है। इसे निर्धारित मानकों के तहत डीजल के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरकारी तेल कंपनियों पर क्यों बढ़ रहा लागत का दबाव?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर तेल कंपनियों के लिए ईंधन खरीदने और बेचने की लागत का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के कारण नुकसान उठा रही हैं।
वहीं, निजी क्षेत्र की Nayara और Jio-bp जैसी कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, बताई गई बढ़ोतरी और सरकारी कंपनियों के प्रति लीटर नुकसान के आंकड़ों को आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करना जरूरी है।
2030 तक 5% बायोडीजल ब्लेंडिंग का लक्ष्य
भारत में जैव ईंधन को बढ़ावा देने के लिए डीजल में बायोडीजल मिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करना, वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
हालांकि, लक्ष्य हासिल करने के लिए उत्पादन, उपलब्धता, गुणवत्ता और वितरण से जुड़ी चुनौतियों को दूर करना भी जरूरी है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि देशभर में सभी पेट्रोल पंपों पर अभी से 5% बायोडीजल मिलाया जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की क्या वजह है?
दी गई जानकारी के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत फरवरी में लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अक्टूबर में 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इसके पीछे पश्चिम एशिया में तनाव, आपूर्ति में संभावित रुकावट और शिपिंग लागत बढ़ने जैसे कारण बताए गए हैं।
हालांकि, इन कीमतों की तुलना करने से पहले संबंधित तारीख और कच्चे तेल के बेंचमार्क की पुष्टि जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी का असर कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है, लेकिन घरेलू पेट्रोल-डीजल के दाम कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करते हैं।
क्या डीजल में एथेनॉल मिलाया जाएगा?
पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के बाद डीजल में भी दूसरे ईंधन घटकों के इस्तेमाल पर चर्चा हुई है। दी गई जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने डीजल के विकल्प के तौर पर बायो-आइसोब्यूटेनॉल जैसे घटक के इस्तेमाल की संभावना का उल्लेख किया था।
फिलहाल, वाहन चालकों के लिए अहम बात यह है कि ईंधन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होना चाहिए। डीजल में बायोडीजल की ब्लेंडिंग को लेकर किसी नई व्यवस्था की जानकारी मिलने पर उसकी आधिकारिक पुष्टि देखना जरूरी है।
