कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर, फिर भी संभला रुपया! डॉलर के मुकाबले क्या है मजबूती की वजह?
मुंबई। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पूंजी निकासी के लगातार बने दबाव के बीच भारतीय रुपये में सोमवार को मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले घरेलू मुद्रा 22 पैसे की बढ़त दर्ज करते हुए 94.75 के स्तर पर कारोबार करती नजर आई। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस रिकवरी की सबसे बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का फॉरेक्स मार्केट में लगातार सक्रिय दखल रहा, जिसने रुपये को अतिरिक्त गिरावट से बचाए रखा।
94.89 पर शुरुआत, 95 के स्तर पर RBI की ‘सॉफ्ट डिफेंस लाइन’
कारोबारी सत्र के दौरान रुपया 94.89 प्रति डॉलर पर खुला, जो इसके पिछले बंद भाव 94.97 के मुकाबले 8 पैसे की मजबूती दर्शाता है। इसके बाद केंद्रीय बैंक के निरंतर समर्थन से मुद्रा ने और बढ़त बनाई। मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि रुपया 95 प्रति डॉलर के इर्द-गिर्द टिका हुआ है, जो केंद्रीय बैंक की ‘सॉफ्ट डिफेंस लाइन’ प्रतीत होती है। इस स्तर पर RBI स्पॉट मार्केट में लगातार डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह भी केंद्रीय बैंक की सक्रियता के चलते रुपये ने बीते चार वर्षों का अपना सबसे शानदार साप्ताहिक प्रदर्शन दर्ज किया था।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली की रफ्तार पड़ी धीमी
अक्टूबर महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 16 अक्टूबर तक कुल 54,636 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जो सितंबर के मुकाबले काफी अधिक है। हालांकि, हालिया सत्रों में इस भारी बिकवाली की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है और 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशक मामूली खरीदार के रूप में उभरे। जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 5.3 प्रतिशत से गिरकर 5.08 प्रतिशत पर आने और रुपये के 95 से नीचे टिके रहने से विदेशी निवेशकों के रुख में यह तात्कालिक बदलाव देखने को मिला है। इसे बाजार का कोई बड़ा ढांचागत बदलाव नहीं, बल्कि रणनीतिक कदम माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों ने फाइनेंशियल और ऑयल सेक्टर में बिकवाली जारी रखी, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म, मनोरंजन, रेस्टोरेंट और हेल्थकेयर जैसे चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी की। इसके अलावा निफ्टी में आई 2.77 प्रतिशत की साप्ताहिक तेजी के बाद शॉर्ट पोजीशन कवर होने से बैंकिंग शेयरों को भी बल मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये को मिली राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई मामूली गिरावट ने भी रुपये को संभलने का मौका दिया। बीते शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया था, लेकिन सोमवार को इसमें एक प्रतिशत से ज्यादा की नरमी दर्ज की गई और भाव घटकर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल कीमतों में यह नरमी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर नए प्रतिबंधों और रूसी वस्तुओं पर टैरिफ हटाने के बाद उपजी परिस्थितियों से जुड़ी है, जिससे वैश्विक बाजार में ईरान से ईंधन निर्यात में इजाफे की संभावना बनने लगी है।
