‘विकास का दीया या तकलीफों पर सियासी नौटंकी?’ पीएम के जन्मदिन और नितिन नबीन के दौरे पर जीतू पटवारी के तीखे सवाल

जीतू पटवारी

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम और भाजपा नेताओं के दौरों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के प्रदेश सह-प्रभारी नितिन नबीन पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पटवारी ने कार्यक्रम की तुलना कोरोना काल की ‘ताली-थाली’ से करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

‘कहीं यह ताली-थाली की याद तो नहीं दिलाएगा?’

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने अपने पोस्ट में नितिन नबीन को संबोधित करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर इंदौर में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन भाजपा नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए।
जीतू पटवारी ने पुराने फैसलों की याद दिलाते हुए लिखा:
“जरा सोचिए, यह दीया कहीं उस ताली-थाली की याद तो नहीं दिलाएगा, जो कोरोना के गंभीर संकट के बीच बजवाई गई थी? क्या यह दीया वैसा ही है, जब नोटबंदी की कतार में प्रधानमंत्री ने अपनी मां को खड़ा करवा दिया था? क्या यह दृश्य उस दौर जैसा तो नहीं दिखता, जब रोम जल रहा था और नीरो चैन से बांसुरी बजा रहा था?”

 

12 साल के कामकाज का मांगा हिसाब

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मध्य प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकारों से बुनियादी मुद्दों पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि अगर पिछले 12 वर्षों के शासन में आम जनता की जिंदगी में वास्तविक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को ठोस रोजगार मिला हो, किसानों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी हुई हो, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर बेहतर हुआ हो और बुनियादी सड़कों का कायाकल्प हुआ हो, तो निश्चित तौर पर दीया जलाया जाना चाहिए।
पटवारी ने आगे तंज कसते हुए कहा कि अगर राज्य का आम नागरिक आज भी रिकॉर्ड महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और लचर सरकारी व्यवस्थाओं से जूझ रहा है, तो सवाल यह उठता है कि यह दीया विकास का प्रतीक है या फिर जनता की तकलीफों पर पर्दा डालने की सियासी नौटंकी?

तंज के साथ दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

जीतू पटवारी ने अपने बयान के अंत में प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई भी दी, लेकिन साथ ही लोकतंत्र के तकाजे की याद दिलाई। उन्होंने लिखा कि इस तर्क के साथ प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं हैं कि लोकतंत्र में औपचारिकता का कोई भी दीया जलाने से पहले जनता के बुनियादी सवालों का अंधेरा दूर करना सबसे जरूरी है।

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