’32 देश, 1 मंच और भारत का डंका’: ब्रिक्स की सफलता पर बोले जयशंकर— दुनिया ने देखा पीएम मोदी का कूटनीतिक जलवा!
नई दिल्ली। राजधानी नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल समापन के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इसे भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक क्षमता की ऐतिहासिक जीत करार दिया है। विदेश मंत्री ने कहा कि पूरे देश और दुनिया ने ब्रिक्स 2026 की सफलता को प्रत्यक्ष देखा है। भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक संघर्षों के दौर में आयोजित इस महासम्मेलन में कुल 32 उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया, जिसने यह साबित कर दिया कि भारत आज वैश्विक मंच पर संतुलन और संवाद का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।
सम्मेलन की भागीदारी का ब्योरा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें 11 सदस्य देश, 10 साझेदार देश 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हुए।
पुतिन, जिनपिंग समेत दुनिया के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा
डॉ. जयशंकर ने रेखांकित किया कि सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता अधिकांश देशों का राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख स्तर पर शामिल होना रहा। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और यूएई के क्राउन प्रिंस समेत तमाम कद्दावर नेता एक मंच पर आए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की उपस्थिति के बीच इन नेताओं और प्रधानमंत्री मोदी के मध्य गजब का व्यक्तिगत तालमेल और रणनीतिक विश्वास देखने को मिला।
टकराव के दौर में साझा सहमति: पश्चिम एशिया और सप्लाई चेन पर फोकस
विदेश मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे नाज़ुक समय पर हुआ जब दुनिया गहरे ध्रुवीकरण और युद्धों का सामना कर रही है। इसके बावजूद ब्रिक्स ने आम सहमति का मजबूत रास्ता निकाला:
पश्चिम एशिया में शांति: मध्य पूर्व के संघर्ष को लेकर सभी देशों ने नागरिकों की सुरक्षा, संप्रभुता के सम्मान और स्थायी शांतिपूर्ण समाधान पर बल दिया।
सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा: युद्ध के प्रभाव से वैश्विक व्यापार, खाद्य आपूर्ति और ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित बनाए रखने पर सभी पक्ष एकमत हुए।
विपरीत ध्रुवों का मिलन: कई ऐसे नेता, जो सामान्य परिस्थितियों में एक-दूसरे से मुलाकात करने से कतराते हैं, उन्होंने नई दिल्ली में एक ही छत के नीचे बैठकर सार्थक संवाद किया।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, दोहरे मापदंड खारिज
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ ब्रिक्स के साझा रुख में अभूतपूर्व दृढ़ता दिखी। सदस्य देशों ने एक स्वर में कहा कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य किसी भी स्थिति में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। सम्मेलन में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। सीमा पार आतंकवाद और आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने तथा आतंकवाद पर चुनिंदा ‘दोहरे मापदंड’ को सिरे से खारिज करने का संकल्प लिया गया।
‘सुधार’ और ‘लचीलापन’: ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज
डॉ. जयशंकर ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन की दो प्रमुख अंतर्निहित थीम सुधार और लचीलापन थीं। सम्मेलन ने विकासशील और अल्पविकसित देशों की प्राथमिकताओं, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को मुख्य धारा में लाने का काम किया।
अपने वक्तव्य के अंत में विदेश मंत्री ने कहा कि कई लोगों को संदेह था कि वैश्विक तनाव के बीच इतना बड़ा सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित हो पाएगा या नहीं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘संवाद, कूटनीति और विकास’ के विजन ने इसे नई दिल्ली में शानदार ढंग से साकार कर दिखाया। भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी निर्णायक नेतृत्व क्षमता साबित की है।
