ग्रेसियस कॉलेज में ‘दीक्षारम्भ-परिचय’ कार्यक्रम आयोजित, विद्यार्थियों को NEP 2020 और स्किल डेवलपमेंट का दिया संदेश
अभनपुर। ग्रेसियस कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के महाविद्यालयीन जीवन की शुरुआत के अवसर पर ‘दीक्षारम्भ-परिचय’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कॉलेज के वातावरण, शिक्षकों और संस्था से परिचित कराने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और भविष्य की तैयारी के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. मनोज दयाल, कुलपति, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर मौजूद रहे। कार्यक्रम में संस्था के संचालक डॉ. आशुतोष शुक्ला, डायरेक्टर राहुल यादव, डॉ. डी. कलाईचेलवी, प्राचार्य, ग्रेसियस कॉलेज ऑफ नर्सिंग, प्राचार्या डॉ. रिया तिवारी, प्राध्यापकगण, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
‘परिचय’ का मतलब खुद को जानना भी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रिया तिवारी ने विद्यार्थियों और अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने ‘परिचय’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिचय सिर्फ एक-दूसरे को जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक महत्वपूर्ण पहलू ‘आपका आपसे परिचय’ भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं, रुचियों और संभावनाओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन खुद को समझने, अपनी क्षमता पहचानने और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण समय है।

शिक्षा के साथ व्यक्तित्व और कौशल विकास जरूरी
संस्था के संचालक डॉ. आशुतोष शुक्ला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कॉलेज का जीवन केवल परीक्षा और शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, कौशल निर्माण और भविष्य की तैयारी का महत्वपूर्ण चरण है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की आदत अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और कौशल पहचानकर उसे लगातार विकसित करना चाहिए।
NEP 2020 और ‘Learn, Unlearn, Relearn’ पर जोर
मुख्य अतिथि प्रो. मनोज दयाल ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विभिन्न पहलुओं को समझाते हुए विद्यार्थियों से पारंपरिक शिक्षा के साथ Skill Development पर भी विशेष ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों के पास व्यावहारिक ज्ञान, कौशल, रचनात्मकता, संचार क्षमता और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता होना भी जरूरी है।
प्रो. दयाल ने विद्यार्थियों को ‘Learn, Unlearn and Relearn’ के सिद्धांत को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में नई चीजें सीखने के साथ उन पुरानी धारणाओं और तरीकों को छोड़ना भी जरूरी है, जो समय के साथ अप्रासंगिक हो चुके हैं। परिस्थितियों के अनुसार खुद को दोबारा सीखने और विकसित करने की क्षमता ही आगे बढ़ने का आधार बनती है।
विद्यार्थियों ने उत्साह से लिया हिस्सा
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और मुख्य अतिथि के विचारों को रुचि के साथ सुना। कार्यक्रम का मंच संचालन तीरथ साहू, सहायक प्राध्यापक, रसायन विज्ञान विभाग ने किया। समापन अवसर पर तेजराम, सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, संस्था के संचालक, डायरेक्टर, प्राचार्या, शिक्षकगण, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अदिति पाण्डेय, युतिका तिवारी, पल्लवी सिन्हा, नीलेश कंसारी, वेणुका निषाद, योगिता साहू, राजेन्द्र साहू और जया साहू सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी महाविद्यालय की मीडिया प्रभारी डॉ. मुक्ता कौशिक, सह-प्राध्यापक ने दी।
