MP में शिक्षक भर्ती को लेकर सरकार का रुख साफ, आरक्षण और बैकलॉग के फेर में फंसा सवा लाख पद का आंकड़ा
भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से शिक्षक भर्ती की राह देख रहे लाखों चयनित व प्रशिक्षित अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने प्रदेश में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार अगले दो वर्षों के भीतर केवल 18 हजार पदों पर ही शिक्षकों की भर्ती करेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि एक साथ सभी खाली पदों पर भर्ती कर पाना व्यावहारिक और प्रशासनिक रूप से संभव नहीं है।
खाली पदों के दावों पर मंत्री का स्पष्टीकरण और अतिथि शिक्षकों की स्थिति
प्रदेश में बड़े पैमाने पर शिक्षकों के पद रिक्त होने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में लगभग 70 हजार अतिथि शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आम तौर पर लोग इन पदों को पूरी तरह से खाली मानकर खबरें बनाने लगते हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जितने भी वास्तविक और आवश्यक पद रिक्त हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से भरा जाए ताकि स्कूलों की व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे।
आरक्षण और बैकलॉग के तकनीकी पेंच का दिया हवाला
शिक्षा मंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक और तकनीकी अड़चनों को साझा करते हुए बताया कि जब भी विभाग भर्ती की प्रक्रिया शुरू करता है, तो तकनीकी तौर पर कई नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। इसमें आरक्षण के नियमों की गणना, बैकलॉग पदों की स्थिति और ओबीसी वर्ग के लिए लंबित 13 प्रतिशत होल्ड पदों का संतुलन बनाए रखना शामिल होता है। इन्हीं तकनीकी और कानूनी बाध्यताओं के चलते रिक्त पदों की संख्या का पुनर्गणना के बाद ही चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
विधानसभा में सवा लाख पदों की बात और मौजूदा हकीकत
गौरतलब है कि बीते विधानसभा सत्र में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में स्वयं स्कूल शिक्षा विभाग ने यह स्वीकार किया था कि प्रदेश में शिक्षकों के करीब सवा लाख पद रिक्त हैं। विपक्ष और बेरोजगार युवा लगातार इन सभी पदों पर त्वरित और पारदर्शी भर्ती की मांग उठा रहे हैं। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस ताजा बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार सवा लाख पदों के बजाय आने वाले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से केवल 18 हजार नियमित पदों पर ही भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की योजना पर आगे बढ़ रही है।
