Budget 2026 for Farmers: किसानों को बड़ी राहत, वित्त मंत्री ने दी 5 अहम सौगात
Budget 2026 for Farmers: केंद्रीय बजट 2026-27 में किसानों के लिए सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए कई अहम योजनाओं का ऐलान किया है। बजट का फोकस कृषि में विविधता, उत्पादकता बढ़ाने और उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने पर है, जिससे छोटे और मझोले किसानों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाया जा सके।
सरकार का कहना है कि पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर किसान अब ऐसी फसलों की खेती कर सकेंगे, जिनकी बाजार में अधिक मांग और बेहतर कीमत है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आमदनी में लगातार इजाफा होगा।
नारियल, काजू और कोको को मिलेगा बढ़ावा
बजट में तटीय क्षेत्रों के लिए नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी फसलों को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है। भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है, जिससे करीब 3 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसे और मजबूत करने के लिए सरकार ने नारियल संवर्धन योजना शुरू करने का ऐलान किया है।
इसके साथ ही काजू और कोको के लिए अलग से समर्पित कार्यक्रम लाया जाएगा, ताकि भारत कच्चे काजू और कोको के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके, प्रसंस्करण बढ़े और निर्यात को मजबूती मिले। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारतीय काजू और कोको को वैश्विक स्तर पर प्रीमियम ब्रांड बनाया जाए।
चंदन से अखरोट तक हाई-वैल्यू खेती पर जोर
चंदन की खेती को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्रित खेती और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
वहीं पहाड़ी और हिली क्षेत्रों में अखरोट, बादाम और पाइन नट्स जैसी महंगी और पौष्टिक फसलों की खेती को समर्थन मिलेगा। पुराने बागानों के पुनरोद्धार और हाई-डेंसिटी प्लांटेशन के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसमें युवाओं की भागीदारी और वैल्यू एडिशन पर खास ध्यान दिया जाएगा।
सिंचाई ढांचे को किया जाएगा मजबूत
उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए सिंचाई बेहद जरूरी है। बजट में पीएम कृषि सिंचाई योजना के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है, जिससे जल उपलब्धता बढ़ेगी और सूखा-बाढ़ जैसी समस्याओं का जोखिम कम होगा।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
इन घोषणाओं से किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य और करीब आता दिख रहा है। छोटे किसान, जो अब तक केवल अनाज या सब्जियों पर निर्भर थे, अब हाई-वैल्यू क्रॉप्स की ओर बढ़ सकेंगे। इससे ग्रामीण रोजगार, कृषि निर्यात और देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
