छत्तीसगढ़ में आज से बिजली बिल हाफ योजना लागू, पढ़िए पूरा हिसाब-किताब
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली बिलों की लगातार बढ़ती रकम ने पिछले कई महीनों से आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ था। अगस्त 2025 में भाजपा सरकार द्वारा हाफ बिजली बिल योजना की सीमा को 400 यूनिट से घटाकर 100 यूनिट करने के बाद लाखों परिवारों के बिल दोगुने हो गए थे। सोशल मीडिया पर विरोध की बाढ़ आ गई, जनप्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ा और विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिए। इसी जनाक्रोश के बीच राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने का बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 18 नवंबर 2025 को विधानसभा के विशेष सत्र में घोषणा की कि 1 दिसंबर 2025 से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट तक की बिजली खपत पर बिल का 50% ही चुकाना होगा। इससे प्रदेश के 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से 42 लाख को सीधा लाभ मिलेगा, जो राज्य की ऊर्जा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
योजना की पूरी जानकारी: कैसे मिलेगा लाभ?
यह योजना मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए है, जो छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के तहत जुड़े हैं। नए प्रावधान के तहत, अगर किसी परिवार की मासिक बिजली खपत 200 यूनिट या उससे कम है, तो कुल बिल का आधा हिस्सा ही वसूला जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई परिवार 150 यूनिट बिजली खर्च करता है, तो उसे सामान्य दरों के आधार पर बने बिल का 50% ही चुकाना पड़ेगा। बिल की गणना स्लैब सिस्टम पर आधारित है – 0-100 यूनिट पर ₹4.10 प्रति यूनिट, 101-200 यूनिट पर ₹4.20 से ₹5.50 प्रति यूनिट, लेकिन हाफ योजना के तहत यह सब 50% सब्सिडी के साथ लागू होगा।
अगर खपत 200 यूनिट से अधिक है, तो पहले 200 यूनिट पर ही हाफ बिल लगेगा और बाकी यूनिट पर पूरी दर लागू होगी। जैसे, 201 यूनिट खपत पर पहले 200 यूनिट हाफ और शेष 1 यूनिट पर सामान्य ₹5.50 प्रति यूनिट। विशेष रूप से, 200 से 400 यूनिट तक खपत करने वाले लगभग 6 लाख उपभोक्ताओं को अगले एक साल (दिसंबर 2026 तक) तक 200 यूनिट पर हाफ बिल का लाभ मिलेगा। यह मोहलत इसलिए दी गई है ताकि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Yojana) के तहत रजिस्ट्रेशन करा सकें और अपने घरों पर सोलर रूफटॉप पैनल लगवा लें। सोलर प्लांट लगाने पर केंद्र से ₹78,000 और राज्य से ₹30,000 की सब्सिडी मिलेगी, जिससे 3 किलोवाट प्लांट से 400 यूनिट तक मुफ्त बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम न सिर्फ उपभोक्ताओं को तात्कालिक आर्थिक राहत देगा, बल्कि बिजली की खपत में संतुलन लाकर ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा भी देगा। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, योजना से राज्य का वार्षिक सब्सिडी बोझ ₹8,000-9,000 करोड़ तक रहेगा, जो पहले 400 यूनिट वाली योजना के ₹10,000 करोड़ से कम है। बीपीएल परिवारों को पहले की तरह 30 यूनिट मुफ्त मिलती रहेगी, जिससे 15 लाख गरीब परिवारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कुल मिलाकर, 36 लाख कम खपत वाले परिवारों को पूर्ण लाभ और 6 लाख मध्यम खपत वालों को आंशिक राहत मिलेगी।
पुरानी योजना से नई तक का सफर
हाफ बिजली बिल योजना की शुरुआत 1 मार्च 2019 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की थी। उस समय 400 यूनिट तक हाफ बिल से 80% से ज्यादा उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे थे। लेकिन दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद, 1 अगस्त 2025 को सीमा घटाकर 100 यूनिट कर दी गई। इससे मध्यम वर्ग के 12-14 लाख परिवारों के बिल 800-1,000 रुपये से बढ़कर 1,600-1,800 हो गए। जुलाई 2025 में बिजली नियामक आयोग द्वारा प्रति यूनिट 20 पैसे की बढ़ोतरी ने हालात और बिगाड़ दिए। जनता का गुस्सा भड़का, कांग्रेस ने घेराव का ऐलान किया और सोशल मीडिया पर #बिजली_बिल_मा_वृद्धि_होही_सांय_सांय जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
विधानसभा के विशेष सत्र (25 वर्षों की छत्तीसगढ़ गठन यात्रा पर) में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव के अनुरोध पर सीएम साय ने 200 यूनिट वाली घोषणा की। यह सत्र पुरानी विधानसभा भवन को विदाई देने का भी अवसर था, जिसे ऐतिहासिक बनाने के लिए यह ‘सौगात’ दी गई। अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव सोलर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की केंद्र सरकार की नीति से जुड़ा है, जहां राज्य में अब तक सिर्फ 1.25 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं, जबकि लक्ष्य 5 लाख है।
सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया मिश्रित है। छोटे परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों से स्वागत की बाढ़ आ गई है। एक उपभोक्ता ने ट्वीट किया, “अब 150 यूनिट का बिल आधा, महीने में 400-500 रुपये की बचत! धन्यवाद सीएम साय।” रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे शहरों में कई ने इसे “जनहितैषी कदम” बताया, खासकर उन परिवारों के लिए जिनकी खपत 100-200 यूनिट के बीच है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #सवर_रहा_छत्तीसगढ़ और #HalfBillScheme200Units जैसे टैग्स वायरल हो रहे हैं, जहां लोग बिल कैलकुलेटर शेयर कर रहे हैं।
लेकिन मध्यम वर्ग और उच्च खपत वाले परिवारों में असंतोष बरकरार है। कई का कहना है कि बिजली दरों में 20 पैसे की बढ़ोतरी के बाद 200 यूनिट हाफ से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, “हम तो 400 यूनिट वाली पुरानी योजना की मांग कर रहे थे, यह आधा-अधूरा समाधान है।” पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर तंज कसा, “100 से 200 पर खुश हो जाओ, लेकिन सोलर लगाने का खर्च कौन उठाएगा?” विपक्ष ने इसे “चुनावी स्टंट” करार दिया, क्योंकि 2028 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। 4 दिसंबर को सीएम हाउस घेराव का ऐलान अभी भी खड़ा है।

सोलर योजना से जुड़ी नई पहल
सरकार इस योजना को सोलर ऊर्जा से जोड़ रही है। 200-400 यूनिट वाले परिवारों को एक साल की छूट के दौरान सोलर प्लांट लगाने का समय दिया गया है। एक 2 किलोवाट प्लांट से 200 यूनिट से ज्यादा बिजली मासिक उत्पादन हो सकता है, जो 25 साल तक चलेगा। राज्य सरकार ने अतिरिक्त ₹30,000 सब्सिडी की घोषणा की है, जिससे कुल मदद ₹1.08 लाख तक पहुंच जाएगी। ऊर्जा मंत्री का कहना है, “यह सब्सिडी से ऊर्जा स्वावलंबन की ओर कदम है।” लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर इंस्टॉलेशन में 3-6 महीने लगते हैं और प्रारंभिक लागत ₹1.5-2 लाख है, जो मध्यम वर्ग के लिए चुनौती है।
राहत की शुरुआत या राजनीतिक खेल?
छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय स्पष्ट रूप से उपभोक्ताओं की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने की प्राथमिकता दर्शाता है। 42 लाख परिवारों को मिलने वाली राहत से सामाजिक संतोष बढ़ेगा और बिजली बिल का बोझ कम होगा। लेकिन 400 यूनिट वाली पुरानी मांग और सोलर अपनाने की चुनौतियां बनी रहेंगी। आने वाले महीनों में देखना होगा कि कितने परिवार सोलर की ओर बढ़ते हैं और क्या विपक्ष का आंदोलन योजना पर असर डालता है।
