Ramavatar Jaggi Murder Case: 21 साल बाद फिर खुलेगा जग्गी हत्याकांड, सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील मंजूर की, अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ी!

रामअवतार जग्गी मर्डर केस (Ramavatar Jaggi Murder Case) में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की उस अपील को मंजूरी दे दी है, जिसमें अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने मामले को वापस छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का आदेश दिया है ताकि वहां इसकी मेरिट पर दोबारा विस्तृत सुनवाई की जा सके।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और मृतक के पुत्र सतीश जग्गी द्वारा दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस फैसले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की तीन सदस्यीय पीठ ने की।

क्या है रामअवतार जग्गी हत्याकांड?

यह चर्चित मामला साल 2003 का है, जब रायपुर में नगर निगम पार्षद रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के पीछे राजनीतिक रंजिश का एंगल सामने आया था, और जांच के दौरान कई राजनीतिक नाम चर्चा में आए थे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी का नाम भी प्रमुख रूप से उछला था।

लंबे समय तक यह केस बिलासपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन रहा, जहां से अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। लेकिन सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अब सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद मामला एक बार फिर हाईकोर्ट में पुनः सुनवाई के लिए लौट गया है।

आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट इस केस की दोबारा सुनवाई करेगा और सभी साक्ष्यों और गवाहों की गहराई से समीक्षा की जाएगी। कोर्ट यह तय करेगा कि पहले दिए गए बरी करने के आदेश में कोई त्रुटि तो नहीं रही।

इस आदेश के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर जग्गी हत्याकांड चर्चा का विषय बन गया है।

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