बागेश्वर धाम पर दीपोत्सव की भव्यता, सवा लाख दीपों से जगमगाया धाम; महाराज ने बांटे मिठाई व चांदी के सिक्के
छतरपुर। दीपावली के पावन पर्व पर बागेश्वर धाम भक्तिमय उत्साह से सराबोर हो उठा। धाम परिसर में सवा लाख दीपों की रोशनी से स्वर्णिम आभा छा गई, जो अज्ञान के अंधकार पर ज्ञान के प्रकाश की विजय का प्रतीक बनी। पूज्य बागेश्वर महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धाम परिवार के सदस्यों, सेवादारों और कर्मचारियों को मिठाई, चांदी के सिक्के व दक्षिणा भेंट कर उनका मान-सम्मान किया। देशभर से पहुंचे भक्तों ने भी इस दिव्य आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
महाराज ने सबसे पहले गौशाला में गौ, अश्व व वाहन पूजन कर शुभारंभ किया। इसके बाद बागेश्वर बालाजी के चरणों में दीप प्रज्ज्वलित कर आतिशबाजी की। भक्तों ने राम नाम, ‘श्री राम जय राम’, ‘ॐ’, पादुका व अन्य धार्मिक प्रतीकों से रंगोली सजाकर घी-तेल के दीप जलाए। पूरे परिसर में 1 लाख 25 हजार दीपक जगमगाए, जिससे धाम एक दिव्य दृश्य प्रस्तुत करने लगा। महाराज ने फुलझड़ी व अनार जलाकर धूमधाम से दीपोत्सव मनाया। भक्तों ने सुख-समृद्धि व शांति की कामना की।
महाराज ने दीप प्रज्वलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “दीपक केवल लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रकाश का है। जैसे दीपक जलने से अंधकार मिटता है, वैसे ही ज्ञान से अज्ञान दूर होता है।” पटाखों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने हास्य के साथ समझाया, “पिछली दीपावली पर पटाखे न जलाने की सलाह दी गई थी, लेकिन कुछ ने नहीं माना। पटाखे फटते हैं, इसलिए दूरी बनाएं। रूस-यूक्रेन युद्ध में बम फट रहे हैं, क्रिकेट जीत, नव वर्ष या शादियों में करोड़ों के पटाखे प्रदूषण फैलाते हैं। पटाखे न जलाएं, लेकिन अगर कोई रोकता है तो जरूर जलाएं।” उन्होंने ‘फटाकों’ से उन लोगों का तात्पर्य भी जो जल्दबाजी में बातें लीक कर देते हैं।
भक्तों के अनुभव
सूरत से आए कालू भाई ने कहा, “बागेश्वर धाम हमारा बाप का घर है। पिछले तीन वर्षों से यहां दीपावली मना रहे हैं।” हरिद्वार से पहुंचे विनय सिंह ने बताया, “पिछले पांच दिनों से शरीर में पीड़ा थी, लेकिन धाम आकर ठीक हो गई। सकारात्मक ऊर्जा मिली। परिवार के साथ आज तक मनाई दीपावली, लेकिन बालाजी के साथ यह पहली बार—बहुत आनंद आया।”
