रायपुर में नेकी की दीवारें होंगी बंद: अब वार्डों में जाकर दान सामग्री जुटाएंगी निगम की गाड़ियां

रायपुर में नेकी की दीवारें होंगी बंद

रायपुर में नेकी की दीवारें होंगी बंद

रायपुर नगर निगम ने अनुपम गार्डन और गांधी उद्यान के पास बनाई गई नेकी की दीवार को बंद करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब निगम हर वार्ड में एक निर्धारित दिन तय करेगा, जिस दिन दानदाता अपने घर पर ही पुरानी या अनुपयोगी सामग्री निगम को दे सकेंगे। इसके लिए दसों जोन में निगम की गाड़ियां भेजी जाएंगी। निगम दान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक अलग मोबाइल एप भी तैयार कर रहा है।

10 नई गाड़ियां खरीदने की तैयारी

एकत्रित सामग्री को आरआर सेंटर में स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपयोग लायक बनाएंगी। इसके बाद वही सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचाई जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जोन के लिए एक नई गाड़ी खरीदी जाएगी। कुल 10 गाड़ियां, जो 70 वार्डों में सप्ताहभर के शेड्यूल के अनुसार घूमकर कपड़े, चादर, कंबल, जूते, बैग आदि सामग्री एकत्र करेंगी।

नेकी की दीवार अव्यवस्था का शिकार

रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने लगभग 38-38 लाख रुपये खर्च कर नेकी की दीवार बनाई थी, जिसे रंगीन लैंडस्कैपिंग और प्रचार के साथ शहर में पेश किया गया था। लेकिन महज चार वर्षों में ही इसका संचालन अव्यवस्था की वजह से ठप हो गया। न तो नगर निगम और न ही स्मार्ट सिटी प्रशासन ने इसकी नियमित देखरेख व सामग्री प्रबंधन में रुचि दिखाई, जिसके कारण यह पहल निष्प्रभावी हो गई।

‘आरआर सेंटर का मॉडल लागू होगा’ – महापौर मीनल चौबे

महापौर मीनल चौबे ने कहा, “नेकी की दीवार की जगह अब आरआर सेंटर का कॉन्सेप्ट ला रहे हैं। दानदाता अपनी सुविधा से सामग्री दे सकेंगे। निगम 10 नई गाड़ियां खरीदेगा और पूरा काम निर्धारित शेड्यूल व पारदर्शिता के साथ होगा।”

पंद्रहवें वित्त आयोग से मिली मंजूरी

स्वच्छ भारत मिशन के सहायक नोडल अधिकारी योगेश कडू ने बताया कि 15वें वित्त आयोग मद से 10 ईएलवी वाहनों की खरीद के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है। हर गाड़ी की कीमत लगभग 11 लाख रुपये होगी। ये गाड़ियां घरों से निकलने वाली पुरानी सामग्री एकत्र करेंगी और उन्हें आरआर सेंटर में व्यवस्थित कर स्लम बस्तियों सहित जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा।

हर दिन एक वार्ड में पहुंचेगी गाड़ी

हर जोन में एक गाड़ी उपलब्ध रहेगी, जो सप्ताह में सात दिन सात अलग-अलग वार्डों को कवर करेगी। इससे दानदाताओं को कहीं आने-जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और जरूरतमंदों तक सामग्री व्यवस्थित ढंग से पहुंचेगी।

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