Fake Antibiotic : क्या बाजार में बिक रही नकली दवा? सप्लायर से लेकर दुकानदार तक पकड़े गए

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Fake Antibiotic: नकली दवा का खतरनाक खेल,तीन गिरफ्तार

राज्य में Fake Antibiotic के कारोबार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एंटीबायोटिक के नाम पर फर्जी दवा बाजार में खपाई जा रही थी। इस पूरे मामले का खुलासा चार महीने की लंबी जांच के बाद हुआ, जिसके बाद तीन दवा कारोबारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

ट्रांसपोर्ट में पकड़ी गई खेप से खुला मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत दिसंबर महीने में हुई, जब गोगांव स्थित एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में Fake Antibiotic की एक संदिग्ध खेप बरामद की गई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की टीम ने मौके पर पहुंचकर दवाओं को जब्त किया और जांच शुरू की। दस्तावेजों और बिल के आधार पर जांच टीम सारंगढ़ के एक मेडिकल स्टोर तक पहुंची, जहां से इस दवा की सप्लाई की कड़ी जुड़ी हुई थी।

दवा नहीं, सिर्फ पाउडर निकला

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिस Fake Antibiotic दवा को बाजार में बेचा जा रहा था, वह असल में सिर्फ एक साधारण पाउडर था। पैकेजिंग पर चेन्नई की एक कंपनी का नाम लिखा हुआ था, लेकिन जांच में पाया गया कि उस नाम की कोई कंपनी अस्तित्व में ही नहीं है। यह खुलासा स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि एंटीबायोटिक जैसी जरूरी दवाओं में मिलावट सीधे मरीजों की जान से जुड़ा मामला है।

मोबाइल जांच से मिला अहम सुराग

जांच के दौरान सारंगढ़ के दवा कारोबारी खेमराम बानी के मोबाइल फोन की जांच की गई, जिसमें नकली दवा से जुड़ी तस्वीरें और अन्य जानकारी मिली। इसके आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि वह इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा था। पूछताछ में उसने बताया कि यह दवा भाटापारा के एक एजेंट के माध्यम से मंगाई गई थी, जिससे जांच का दायरा और बढ़ गया।

इंदौर से संचालित हो रहा था नेटवर्क

जांच आगे बढ़ने पर टीम भाटापारा और फिर इंदौर तक पहुंची। यहां से मां बिजायन मेडिकोज नामक होलसेलर के जरिए इस Fake Antibiotic की सप्लाई की जा रही थी। टीम ने वहां से संबंधित दस्तावेज, ऑर्डर और भुगतान से जुड़े सबूत जुटाए। इस पूरी कार्रवाई में पुलिस की भी मदद ली गई, जिससे केस को मजबूत आधार मिल सका और आरोपियों तक पहुंचना आसान हुआ।

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तीन आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजे गए

सभी साक्ष्य एकत्र करने के बाद 13 अप्रैल को तीनों आरोपियों—इंदौर के सप्लायर, भाटापारा और सारंगढ़ के दवा कारोबारी—को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। उन्हें अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

राज्य में बढ़ते नकली दवा के मामले

यह मामला राज्य में Fake Antibiotic कारोबार का तीसरा बड़ा खुलासा है। इससे पहले गरियाबंद में नकली कफ सिरप और रायगढ़ में नकली क्रीम के मामले सामने आ चुके हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने दवा बाजार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और निगरानी को और सख्त करने की जरूरत को उजागर किया है।

जांच के दौरान विवाद भी सामने आया

Fake Antibiotic केस की जांच के दौरान एक जांच अधिकारी को आरोपी के साथ संदिग्ध स्थिति में मिलने के कारण निलंबित कर दिया गया था। इस घटना के बाद जांच टीम पर कई तरह के दबाव भी बने, लेकिन इसके बावजूद टीम ने जांच पूरी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

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FAQ (fake antibiotic case)

1. भारत में fake antibiotic case क्या है?

भारत में fake antibiotic case एक ऐसा मामला है, जिसमें एंटीबायोटिक के नाम पर नकली दवा बेची जा रही थी। जांच में पता चला कि यह दवा असल में सिर्फ पाउडर थी और उस पर फर्जी कंपनी का नाम लिखा गया था।

2. counterfeit medicine racket का खुलासा कैसे हुआ?

यह counterfeit medicine racket तब सामने आया जब ट्रांसपोर्ट में संदिग्ध दवा की खेप पकड़ी गई। इसके बाद बिल, दस्तावेज और मोबाइल डेटा के आधार पर पूरी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ।

3. fake drug supply chain India में कौन-कौन शामिल थे?

इस fake drug supply chain India मामले में इंदौर के सप्लायर समेत भाटापारा और सारंगढ़ के दो दवा कारोबारी शामिल थे, जिन्हें जांच के बाद गिरफ्तार किया गया।

4. Drug and Cosmetic Act के तहत क्या कार्रवाई हुई?

इस मामले में आरोपियों को Drug and Cosmetic Act के तहत गिरफ्तार किया गया और कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

5. fake antibiotic India मामला इतना गंभीर क्यों है?

fake antibiotic India मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इसमें जरूरी दवाओं के साथ फर्जीवाड़ा किया गया है, जो मरीजों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

 

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