Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam : रद्दी साड़ियां थोपकर महिलाओं का अपमान! अब वापस मांगकर छुड़ा रहे जान…

Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam

Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam : रद्दी साड़ियां थोपकर महिलाओं का अपमान! अब वापस मांगकर छुड़ा रहे जान…

 

500 रुपये की साड़ी के नाम पर 250 रुपये वाली कतरन बांटी, अब वापस मंगाकर बचाव की कोशिश…

 

Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam। छत्तीसगढ़ की BJP सरकार एक बार फिर महिलाओं के हितों के साथ खिलवाड़ करती नजर आ रही है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को यूनिफॉर्म के रूप में दी गई साड़ियों में भारी घोटाला सामने आया है। वर्ष 2024-25 में 1.94 लाख आंगनबाड़ी बहनों के लिए 500 रुपये प्रति साड़ी की दर से करीब 9.7 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन मिलीं घटिया और छोटी साड़ियां। सरकारी मापदंड के अनुसार 5.5 मीटर लंबी साड़ी होनी चाहिए थी, पर कई जिलों में 5 मीटर या उससे भी कम लंबाई की साड़ियां बांटी गईं।

बुनाई घटिया, रंग उतरने वाला और धोने के बाद सिकुड़ जाने वाली ये साड़ियां बाजार में 250 रुपये से भी कम में उपलब्ध हैं।

यह घोटाला केवल पैसे की बर्बादी नहीं, बल्कि उन समर्पित महिलाओं का सीधा अपमान है जो आंगनबाड़ी केंद्रों पर गरीब बच्चों और महिलाओं की सेवा करती हैं।

केंद्र सरकार की ICDS योजना के तहत दो साड़ियां देने का प्रावधान था, जिसमें 60% केंद्रांश (300 रुपये) और 40% राज्यांश (200 रुपये) शामिल था।

लेकिन विभाग ने खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की चेतावनी को नजरअंदाज कर 500 रुपये की दर पर टेंडर आगे बढ़ाया, जबकि बोर्ड ने साफ कहा था कि निर्धारित गुणवत्ता पर 718 से 860 रुपये (GST सहित) लगेंगे।

 

 घोटाले की जड़ें विभागीय लापरवाही में

 

Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam : 26 मार्च 2025 को जारी आदेश में विभाग ने यूनिफॉर्म वितरण की स्वीकृति दी। अगस्त 2025 से फरवरी 2026 तक साड़ियां बांटी गईं। लेकिन जमीनी हकीकत चौंकाने वाली निकली।

कई जिलों से शिकायतें आईं कि साड़ियां छोटी हैं, बुनाई मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, रंग छोड़ती हैं और धोने पर सिकुड़ जाती हैं। राज्य स्तर पर गठित समिति ने जांच की और गुणवत्ता में विचलन की पुष्टि की।

Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam

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7 अप्रैल 2026 को नए आदेश में विभाग ने माना कि गड़बड़ी हुई है। अब दोषपूर्ण साड़ियां वापस मंगाने और बदलने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलों को एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजने को कहा गया है, वरना बाद में कोई शिकायत स्वीकार नहीं की जाएगी। यह सख्ती दिखाने की कोशिश है, लेकिन सवाल उठता है इतने बड़े पैमाने पर घोटाला होने कैसे दिया गया? क्या विभाग की नजर पूरी तरह बंद थी या जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं?

 

बहनों का सम्मान इतना सस्ता है?

 

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने खुद साड़ी धोकर देखने का दावा किया, लेकिन यह महज ड्रामा साबित हो रहा है।

जब खादी बोर्ड ने पहले ही कम दर पर सप्लाई की असमर्थता जताई थी, तब मंत्री और विभाग ने क्यों नहीं सतर्कता बरती? क्यों घटिया ठेकेदारों को काम सौंपा गया? कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, लेकिन सरकार बचाव में लगी है।

मंत्री जी ने खादी बोर्ड को जिम्मेदार ठहराकर अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश की है, जबकि मूल जिम्मेदारी विभाग की है।

यह मामला BJP सरकार की महिलाओं प्रति उदासीनता को उजागर करता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और सहायिकाएं कम वेतन पर दिन-रात मेहनत करती हैं। बच्चों के पोषण, टीकाकरण, शिक्षा और माताओं की देखभाल जैसी जिम्मेदारियां उनके कंधों पर हैं।

ऐसे में उन्हें घटिया यूनिफॉर्म देकर सरकार क्या संदेश दे रही है? क्या इन बहनों का सम्मान इतना सस्ता है?

 

विपक्ष भी सुना रहा खरी खरी

 

Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam ने पूरे प्रदेश में सियासी माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस ने इसे BJP सरकार का सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार बताया है। विपक्ष का आरोप है कि 9.7 करोड़ रुपये के फंड में से बड़ा हिस्सा ठेकेदारों और दलालों की जेब में गया। बाजार में 250 रुपये वाली साड़ी को 500 रुपये में खरीदकर बाकी पैसा कहां गया यह जांच का विषय है।

 

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सफाई कमजोर नजर आती है। उन्होंने कहा कि जहां शिकायतें मिलेंगी, वहां साड़ियां बदली जाएंगी। लेकिन सवाल है पूरे वितरण प्रक्रिया की निगरानी कौन कर रहा था? गुणवत्ता जांच की क्या व्यवस्था थी? खादी बोर्ड की चेतावनी को नजरअंदाज करना विभागीय लापरवाही नहीं तो क्या है?

 

छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को अब फिर जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन पहले ही चेतावनी देने के बावजूद विभाग ने उनकी बात नहीं मानी। अब दोबारा उन्हें ही काम सौंपना सवाल खड़े करता है। क्या सरकार वाकई गुणवत्ता सुनिश्चित करना चाहती है या बस समय गुजारने की कोशिश कर रही है?

 

 आंगनबाड़ी बहनों की पीड़ा

 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और सहायिकाएं ग्रामीण क्षेत्रों में काम करती हैं। साड़ी उनकी यूनिफॉर्म है, जो उन्हें पहचान देती है। लेकिन छोटी और घटिया साड़ी पहनकर वे कैसे काम करेंगी? कई बहनों ने बताया कि साड़ी इतनी छोटी है कि ठीक से लपेटी भी नहीं जा सकती। धोने के बाद रंग उतर जाता है, जो उनकी गरिमा को प्रभावित करता है।

 

Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam केवल एक विभागीय गलती नहीं है। यह महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर हो रहे ढोंग को उजागर करता है। BJP सरकार “नारी शक्ति” और “बेटी बचाओ” के नारे लगाती है, लेकिन हकीकत में आंगनबाड़ी बहनों को रद्दी सामान थोप रही है। 1.94 लाख महिलाओं का अपमान पूरे प्रदेश की महिलाओं का अपमान है।

 

सरकार से सवाल

 

1. खादी बोर्ड की चेतावनी को नजरअंदाज क्यों किया गया?

2. गुणवत्ता जांच की क्या प्रक्रिया अपनाई गई?

3. 9.7 करोड़ रुपये में से कितना पैसा वास्तविक सप्लाई पर खर्च हुआ?

4. दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

 

BJP सरकार को अब जवाबदेही तय करनी होगी। महज साड़ियां बदलने के आदेश देकर मामला दबाया नहीं जा सकता। पूरी प्रक्रिया की CBI या SIT जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके।

 

 महिलाओं के साथ अन्याय बंद हो

 

Chhattisgarh Anganwadi Saree Scam बीजेपी सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार का ताजा उदाहरण है। लक्ष्मी राजवाड़े जैसे मंत्री अगर विभाग संभाल नहीं सकतीं तो इस्तीफा दे दें। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं सेवा का प्रतीक हैं, उन्हें घटिया सामान देकर उनका शोषण नहीं किया जा सकता।

 

सरकार को तुरंत गुणवत्ता वाली साड़ियां उपलब्ध करानी होंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। अन्यथा जनता इस अन्याय को याद रखेगी। महिलाओं का सम्मान राजनीति से ऊपर है इसे समझने का समय आ गया है।

 

Note : यह लेख तथ्यों पर आधारित आलोचनात्मक विश्लेषण है जो सरकारी लापरवाही को उजागर करता है। जनहित में सच्चाई सामने लाना मीडिया की जिम्मेदारी है।

 

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